नोएडा-गाजियाबाद में डीजल ऑटो पर लगा बैन, इन जिलों में भी बढ़ेगी सख्ती - जानें योगी सरकार ने क्यों लिया ये फैसला

यूपी सरकार ने नोएडा और गाजियाबाद में डीजल ऑटो पर बैन लगा दिया है. अधिकारियों का कहना है सरकार लंबे समय से यह योजना बना रही थी. जानें और किन जिलों में प्रतिबंध लागू होगा और क्या बदलाव होंगे.

Published date india.com Published: November 22, 2025 7:47 PM IST
नोएडा-गाजियाबाद में डीजल ऑटो पर लगा बैन, इन जिलों में भी बढ़ेगी सख्ती - जानें योगी सरकार ने क्यों लिया ये फैसला

यूपी में बढ़ते वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. न्यूज एजेंसी PTI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार ने नोएडा और गाजियाबाद में डीजल ऑटोरिक्शा पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है. अधिकारियों का कहना है सरकार लंबे समय से यह योजना बना रही थी कि NCR क्लस्टर में डीजल ऑटो को चरणबद्ध तरीके से बंद किया जाए. क्योंकि ये वाहन हवा में जहरीले धुएं का बड़ा स्रोत बन चुके थे. सरकार का कहना है कि यह फैसला न सिर्फ प्रदूषण घटाने में मदद करेगा, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य को भी लंबे समय में बड़ा फायदा पहुंचाएगा.

नोएडा-गाजियाबाद के साथ किन जिलों में बढ़ेगी सख्ती?

सरकार द्वारा जारी नई गाइडलाइन्स के अनुसार, गौतम बुद्ध नगर (नोएडा-ग्रेटर नोएडा) और गाजियाबाद में डीजल ऑटो पर तुरंत प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया गया है. मेरठ आरटीए पहले ही नए परमिट और नवीनीकरण की प्रक्रिया रोक चुका था, लेकिन अब इसे आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया गया है. इसके अलावा, बागपत में 31 दिसंबर 2025, जबकि मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर और शामली में अगले साल 31 दिसंबर तक सभी डीजल ऑटो बंद हो जाएंगे.

धूल और स्मॉग कम करने के लिए और क्या उपाय अपनाएं जा रहे

सरकार का कहना है कि सड़क धूल एनसीआर में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है. इसलिए इसे रोकने के लिए प्राधिकरण ने खास तैयारी की है. नोएडा और ग्रेटर नोएडा में सड़क किनारे धूल को नियंत्रित करने के लिए एंटी-स्मॉग गन, वॉटर स्प्रिंकलर और मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनें तैनात कर दी गई हैं. अधिकारियों का दावा है कि आने वाले महीनों में इन उपायों का बड़ा असर दिखेगा और प्रदूषण स्तर में तेजी से गिरावट होगी.

निगरानी के लिए कमेटी बनाई गई, अधिकारी नियुक्त किए गए

बड़े लेवल पर इस फैसले को लागू करने के लिए सरकार ने पूरी निगरानी व्यवस्था तैयार की है. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रमुख सचिव को इस पूरे अभियान का नोडल अधिकारी बनाया गया है. इसके साथ ही राज्य स्तर पर प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग यूनिट (PMU) गठित की गई है, जिसमें शहरी विकास, पीडब्ल्यूडी, आवासन एवं नियोजन और औद्योगिक विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे. यह टीम लगातार यह सुनिश्चित करेगी कि प्रतिबंध सही तरीके से लागू हो और किसी भी जिले में पुराने डीजल ऑटो दोबारा सड़क पर ना दिखाई दें.

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