शिलांग: मेघालय मंत्रिमंडल ने डिक्की बंदी स्टेडियम का नाम बदलकर पूर्व लोकसभा स्पीकर पी ए संगमा के नाम पर रखने का फैसला लिया है. राज्य के गृह मंत्री जेम्स के संगमा ने पत्रकारों से कहा कि मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य नामकरण प्राधिकरण के सुझावों को मंजूरी दे दी गई. उन्होंने बताया कि पूर्व सांसद के नाम पर बने डिक्कीबंदी स्टेडियम और तुरा में एएमपीटी की ओर जा रहे एक जंक्शन का नाम पी ए संगमा के नाम पर रख दिया गया है.

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पी ए संगमा मेघालय के पूर्व मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं. वह कई बार तुरा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीते. पी ए संगमा का जन्म 1 सितंबर 1947 को पश्चिम गारो हिल्स, मेघालय के चपाथी गांव में हुआ था. शिलांग से स्नातक की पढाई पूरी करने के बाद पी.ए. संगमा ने डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय से अंतर्राष्ट्रीय संबंध में पोस्ट ग्रेजुएट की उपाधि हासिल की. इसके बाद उन्होंने एलएलबी की पढ़ाई की. वर्ष 1973 में पी.ए. संगमा प्रदेश युवा कांग्रेस समिति के अध्यक्ष निर्वाचित हुए जिसके कुछ ही समय बाद वह इस समिति के महासचिव बनाए गए.

1975 से 1980 तक वह प्रदेश कांग्रेस समिति के महासचिव रहे. वर्ष 1977 के लोकसभा चुनावों में पी ए संगमा तुरा निर्वाचन क्षेत्र से जीत दर्ज करने के बाद पहली बार सांसद बने. चौदहवीं लोकसभा चुनावों तक वह इस पद पर लगातार जीतते रहे. हालांकि नौवीं लोकसभा में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. 1988-1991 तक वे मेघालय के मुख्यमंत्री रहे. वर्ष 1999 में कांग्रेस से निष्कासित होने के बाद शरद पवार और तारिक अनवर के साथ मिलकर पी.ए. संगमा ने नेशनल कांग्रेस पार्टी की स्थापना की. 10 अक्टूबर 2005 को अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के सदस्य के तौर पर लोकसभा पद से इस्तीफा देने के बाद पी.ए. संगमा फरवरी 2006 में नेशनल कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधि के तौर पर संसद पहुंचे. 2008 के मेघालय विधानसभा चुनावों में भाग लेने के लिए उन्होंने चौदहवीं लोकसभा से इस्तीफा दिया था. 68 वर्ष की आयु में 4 मार्च 2016 को नई दिल्ली में हार्ट अटैक से उनकी मृत्यु हो गई थी.

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कोनराड के संगमा और जेम्स के संगमा दोनों उनके बेटे हैं. उन्होंने कहा, ‘‘इस बात की काफी समय से मांग थी क्योंकि स्टेडियम निर्माण पर खर्च किए गए अधिकांश पैसे पी ए संगमा ने (तुरा के सांसद के तौर पर) अपने कार्यकाल के दौरान दिए थे. आज राज्य सरकार स्टेडियम निर्माण की दिशा में उनके (पी ए संगमा) योगदान को सम्मानित कर रही है.’’ उन्होंने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल ने सेंट टेरेसा को सम्मान देते हुए मवलाई-मवारोह से मदन की ओर जाने वाली सड़क का नाम भी बदलने का निर्णय किया है.