नई दिल्ली. केंद्र सरकार की तरफ से जम्मू-कश्मीर में वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा ने कहा है कि लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखने और घाटी में हिंसा में कमी आने के बाद ही किसी तरह की राजनीतिक वार्ता शुरू होगी. आईबी के पूर्व डायरेक्टर शर्मा को कश्मीर में पत्थरबाजी में गिरफ्तार युवाओं से माफी प्रोग्राम चलाने का श्रेय भी जाता है. इतना ही नहीं रमजान के दौरान सीजफायर पर सरकार को मनाने का भी श्रेय उन्हीं को जाता है. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए उन्होंने कहा, वहां सबसे बड़ी चुनौती है कि लोगों की भावनाओं को शांत किया जाए. इसमें भी खासतौर पर युवाओं की. Also Read - गणतंत्र दिवस से पहले जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों को मिली बढ़ी कामयाबी, 150 मीटर लंबी सुरंग का लगाया पता

दूसरे मुद्दे भी हैं
उन्होंने आगे कहा, वहां दूसरे प्रमुख मुद्दे हैं कि लोकल युवाओं को मिलिटेंसी की तरफ जाने से रोका जाए, मिलिटेंसी ज्वाइन किए हुए युवाओं को कैसे वापस लाया जाए, उन्हें समझाया जाए कि बंदूक और हिंसा किसी भी समस्या का हल नहीं है. यह सिर्फ दुख देता है और किस तरह राज्य के हर क्षेत्र में रहने वाले लोगों के बीच सद्भावना बनाई जाए. Also Read - आखिर किस वजह से जम्मू-कश्मीर के कैदियों को आगरा जेल स्थानांतरित किया गया, जानें पूरी डिटेल्स

गृहमंत्री कर रहे हैं दौरा
बता दें कि शर्मा का ये बयान गृहमंत्री राजनाथ सिंह के दौरे से पहले आया है. वह 7 जून से कश्मीर के दौरे पर हैं. इस दौरान वह वहां के स्थिति का जायजा लेंगे और रमजान के दौरान सुरक्षा अभियानों पर रोक का अवलोकन करेंगे. Also Read - केंद्र सरकार ने सिविल सर्विसेज का जम्मू-कश्मीर कैडर किया खत्म, अधिसूचना जारी कर AGMUT में किया विलय

वार्ता संभव नहीं
शर्मा ने कहा, जब तक हम लोगों की भावनाओं को संबोधित करने और हिंसा को कम करने में सझम नहीं हैं, किसी भी तरह की राजनीतिक चर्चा बहुत कठीन है. सबसे पहले हम लोगों को सुनिश्चि करना होगा कि वहां शांति आए. इसके बाद ही कोई राजनीतिक वार्ता शुरू हो सकती है.