चेन्नई: जन सुरक्षा कानून (पीएसए) को क्रूर कानून बताते हुए द्रमुक ने जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों–उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती समेत अन्य कश्मीरी नेताओं की हिरासत बढ़ाने को लेकर केंद्र पर हमला बोला. पार्टी ने उनकी तत्काल रिहाई की मांग की. Also Read - Tamil Nadu CM Oath: एमके स्टालिन ने 33 मंत्र‍ियों के साथ ली तमिलनाडु के सीएम के पद की शपथ

केंद्र ने इस सख्त कानून (पीएसए) के तहत छह फरवरी को दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों के खिलाफ मामला दर्ज किया. इससे चंद घंटे पहले ही उनकी छह माह की “एहतियातन हिरासत” की अवधि खत्म होने वाली थी. केंद्र पर निशाना साधते हुए, तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी ने आरोप लगाया कि जन सुरक्षा कानून (पीएसए) क्रूर कानून है और कश्मीरी नेताओं की हिरासत की अवधि बढ़ाए जाने की निंदा की. Also Read - पश्चिम बंगाल चुनाव: शरद पवार और महबूबा मुफ़्ती ने ममता बनर्जी को दी बधाई, कही ये बात

मानवाधिकार और व्यक्तिगत आजादी के खिलाफ है कानून
द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने आरोप लगाया कि ऐसे कठोर कानून किसी भी राज्य में और किसी भी नेता के खिलाफ लागू किए जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसा परिदृश्य देश और केंद्र-राज्य के रिश्तों के लिए भी उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि भारत की अखंडता में यकीन करने वाले नेताओं को हिरासत में रखना मानवाधिकार और व्यक्तिगत आजादी के खिलाफ है और यह संविधान एवं लोकतंत्र में लोगों के विश्वास को धता बताने के समान है. Also Read - तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2021 Latest Update: Tamil Nadu में स्पष्ट बहुमत की ओर डीएमके, स्टालिन के जादू से AIADMK पस्त!