नई दिल्ली. आपने दक्षिण भारत के बहुत कम राजनेताओं को उत्तर भारतीय राज्यों में चुनाव प्रचार या अन्य राजनीतिक गतिविधियों में देखा होगा. हो सकता है कि इक्का-दुक्का नाम को छोड़, कई दक्षिण भारतीय नेताओं के नाम भी आपको याद न हों. खासकर बढ़ती अवस्था के साथ तो कई नेताओं की सक्रियता और कम हो जाती है. उदाहरण के बतौर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और जॉर्ज फर्नांडिस को ही देखें, तो कई दशकों तक सार्वजनिक जीवन में रहने के बाद भी ये दोनों कद्दावर नेता अपने स्वास्थ्य संबंधी कारणों से पिछले कुछ वर्षों से सार्वजनिक तौर पर नहीं दिखे हैं. वहीं, इनके मुकाबले दक्षिण भारतीय राजनीति के कद्दावर नेता और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि आज भी सक्रिय हैं.

देश के सबसे बुजुर्ग नेताओं में से एक और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि ने रविवार को अपना 95वां जन्मदिन मनाया. तमिलनाडु के 5 बार मुख्यमंत्री रहे एम. करुणानिधि का जन्म 3 जून 1924 को तिरुवरूर के तिरुकुवालाई में हुआ था. तमिल नाटक से लेकर फिल्मों के पटकथा लेखन के बाद दक्षिण भारत के कद्दावर नेता अन्नादुरई की अपील पर राजनीति में आने वाले करुणानिधि का राजनीतिक जीवन किशोरावस्था से ही शुरू हो गया था. करुणानिधि के स्कूल में दाखिले से जुड़ी एक रोचक कहानी है. अंग्रेजी अखबार ‘द हिन्दू’ के अनुसार हुआ यूं था कि वर्ष 1938 में तिरुवरूर के हाईस्कूल में करुणानिधि को दाखिला नहीं मिल रहा था. ऐसे में एक दिन करुणानिधि दरबान को धता बताते हुए सीधे हेडमास्टर के दफ्तर में पहुंच गए और उनसे स्कूल में दाखिला दिलवाने को कहा. हेडमास्टर ने दाखिले से इनकार कर दिया तो बालक करुणानिधि ने तत्काल धमकी दी कि अगर स्कूल में एडमिशन न मिला तो वे तिरुवरूर के त्यागराजस्वामी मंदिर के तालाब में कूदकर आत्महत्या कर लेंगे. छोटे से बच्चे की इस बात पर हेडमास्टर सकते में आ गए. चूंकि मंदिर के तालाब में इससे पहले भी ऐसी कई घटनाएं हो चुकी थीं, लिहाजा हेडमास्टर ने तत्काल करुणानिधि का दाखिला पांचवीं कक्षा में करने की अनुमति दे दी.

करुणानिधि ने रविवार को 95वां जन्मदिन मनाया. (फोटो साभारःटि्वटर)

करुणानिधि ने रविवार को 95वां जन्मदिन मनाया. (फोटो साभारःटि्वटर)

 

बचपन से ही विरोधी प्रवृत्ति के रहे हैं करुणानिधि
स्कूली जीवन की यह घटना करुणानिधि को समझने के लिए काफी है. सेहत संबंधी कारणों से पिछले कुछ वर्षों से खुद को मीडिया की सुर्खियों से दूर रखने वाले इस राजनेता को तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति को बढ़ावा देने वालों में से एक माना जाता है. समाज में फैले जातिवाद और धार्मिक रूढ़ीवाद के खिलाफ करुणानिधि हमेशा से मुखर रहे हैं. इसलिए समाजवादी विचारधारा के तमिलनाडु में प्रचार-प्रसार में उनका योगदान बड़ा माना जाता है. 1960 के दशक में तमिलनाडु में चल रहे द्रविड़ आंदोलन के दौरान भी करुणानिधि समाजवादी विचारों को बढ़ावा देने वाली कहानियां लिखने के लिए मशहूर थे. उन्होंने तमिल सिनेमा ‘पराशक्ति’ नामक फिल्म की पटकथा लिखी थी. उनकी लिखी फिल्में भी उनकी राजनीतिक विचारधारा का प्रचार-प्रसार करती थीं. 1950 के दशक में उनके लिखे दो नाटकों पर प्रतिबंध तक लगा दिया गया था.

समकक्ष राजनीतिज्ञों के मुकाबले ज्यादा सक्रिय
देश में एक तरफ जहां अटल बिहारी वाजपेयी, जॉर्ज फर्नांडिस, जसवंत सिंह जैसे बुजुर्ग राजनीतिज्ञ पिछले कई वर्षों से राजनीतिक परिदृश्य से गायब दिखते हैं. वहीं दूसरी ओर डीएमके नेता करुणानिधि आज 95 साल की अवस्था में भी राजनीति में सक्रिय बने हुए हैं. हालांकि साल 2017 में उनका 94वां जन्मदिन समारोहपूर्वक नहीं मनाया गया था, लेकिन इस बार 95वें जन्मदिन के मौके पर उनके गोपालपुरम स्थित आवास पर केक काटा गया. इस अवसर पर करुणानिधि के परिजनों समेत उनकी पार्टी के असंख्य कार्यकर्ता इकट्ठा हुए और अपने नेता का जन्मदिन हर्ष और उल्लास के साथ मनाया. यह उनकी राजनीतिक सक्रियता ही है, जिसके कारण करुणानिधि को उनके जन्मदिन पर तमिलनाडु समेत देशभर के विभिन्न पार्टियों के नेताओं ने शुभकामना दी. बता दें कि खराब सेहत के कारण दक्षिण भारत के इस दिग्गज राजनेता को तमिलनाडु विधानसभा से छुट्टी मिली हुई है. करुणानिधि वर्ष 2016 में अंतिम बार विधानसभा पहुंचे थे. अभी वह तमिलनाडु की तिरुवरूर विधानसभा सीट से विधायक हैं.

1957 से अब तक 12 बार विधायक रहे हैं करुणानिधि
तमिलनाडु के 5 बार मुख्यमंत्री रहे एम. करुणानिधि पिछले करीब 6 दशकों से राजनीतिक जीवन में बने हुए हैं. वे पहली बार तमिलनाडु की कुलाथालाई विधानसभा सीट से वर्ष 1957 में विधायक बने थे. उसके बाद उन्होंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. यही नहीं, उन्होंने जितनी बार भी अपनी सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ा, उन्हें कभी पराजय का सामना नहीं करना पड़ा. वह तमिलनाडु विधानसभा में 12 बार विधायक चुने गए हैं. करुणानिधि 1967 में पहली बार तमिलनाडु की सत्ता में आए. उन्हें लोक निर्माण मंत्री बनाया गया था. वर्तमान में उनकी खराब सेहत की वजह से उनके बेटे स्टालिन द्रविड़ मुनेत्र कड़गम पार्टी का कामकाज देखते हैं. स्टालिन ही पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वहीं करुणानिधि की बेटी और राज्यसभा सांसद कनिमोझी पर भी पार्टी का कामकाज देखने की जिम्मेदारी है.