नई दिल्ली: दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा है कि वह यात्रियों को मुफ्त पेयजल मुहैया नहीं कर सकती क्योंकि उसके पास खुद जल का कोई साधन नहीं है. वह जलापूर्ति के लिए अन्य एजेंसियों पर निर्भर है और उसके स्‍टाफ भी पानी खरीदकर पीते हैं.

डीएमआरसी ने अदालत से कहा कि वह अपने कर्मचारियों के लिए तीसरे पक्ष के विक्रेताओं से पेयजल खरीदती है. यदि किसी मेट्रो स्टेशन पर भुगतान के साथ मिलने वाला पेयजल उपलब्ध नहीं है तो वह यात्रियों को मुफ्त में मुहैया कराएगी. दिल्ली मेट्रो ने मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति वी के राव की पीठ के समक्ष दाखिल किए गए एक हलफनामे में यह कहा है.

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दिल्ली मेट्रो ने हलफनामा में यह भी कहा है कि लगभग सभी मेट्रो स्टेशनों पर दो रुपये प्रति ग्लास पेयजल उपलब्ध है. जहां यह उपलब नहीं है, वहां यात्री कर्मचारी से पानी मांग सकते हैं जो उन्हें मुफ्त में मुहैया कराएंगे.

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डीएमआरसी ने अदालत को यह भी बताया कि वह अपनी सेवाओं पर प्रतिक्रियाओं के लिए अपने यात्रियों से नियमित रूप से बातचीत करती है और किसी ने भी पेयजल के अभाव के बारे में शिकायत नहीं की है. डीएमआरसी ने अदालत को बताया कि इस बारे में यात्रियों को सूचना देने वाले संकेत लगाए जाएंगे. बहरहाल, अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी के लिए सूचीबद्ध कर दी.