नई दिल्ली: दिल्ली सरकार की एक कमेटी ने सुझाव दिया है कि कोविड-19 संकट के मद्देनजर शहर के स्वास्थ्य ढांचे का इस्तेमाल केवल राष्ट्रीय राजधानी के निवासियों के उपचार में होना चाहिए. सूत्रों ने शनिवार को इस बारे में जानकारी दी है. डॉ. महेश वर्मा के नेतृत्व वाली कमेटी ने सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. इसमें कहा गया है कि अगर दिल्ली का स्वास्थ्य ढांचा बाहर के लोगों के लिए खुला रहा तो तीन दिन में सारे बेड भर जाएंगे. Also Read - दिल्ली में कोरोना के 2,505 नए मामले सामने आए, 10 लाख की आबादी पर किए जा रहे 32,650 टेस्ट

शुक्रवार को दिल्ली में कोरोना वायरस के 1330 मामले सामने आए. इस तरह शहर में संक्रमित लोगों की संख्या 26,000 को पार कर गयी है. संक्रमण से अब तक 708 लोगों की मौत हो चुकी है. Also Read - दिल्ली, मुंबई, चेन्नई सहित 6 शहरों से कोलकाता के लिए कोई यात्री उड़ान नहीं होगी

इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कोविड-19 के मरीजों को भर्ती करने से मना करने वाले और ‘‘बेड की कालाबाजारी’’ में लिप्त अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है . उन्होंने कहा कि उनकी सरकार एक आदेश जारी करने वाली है कि अस्पताल ऐसे मरीजों का उपचार करने से इनकार नहीं कर सकते. Also Read - Earthquake in Delhi: दिल्ली-NCR में भूकंप के झटकों से कांपी धरती, रिएक्टर स्केल पर 4.7 मापी गई तीव्रता

केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार सभी अस्पतालों में एक चिकित्सा पेशेवर को तैनात करेगी, जो आधिकारिक ऐप पर कोरोना वायरस मरीजों के लिए उपलब्ध बेड की सूचना देंगे और ऐसे मरीजों की भर्ती सुनिश्चित कराने का काम करेंगे.