नई दिल्ली. पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन ने कहा है पिछले साल डोकलाम में चीन द्वारा पैदा किए गए विवाद का मकसद भारत को अपने पड़ोसी देश भूटान से दूर करना था. उन्होंने कहा कि चीन अपनी डोकलाम नीति के जरिए भारत के लिए नई मुसीबतें पैदा करना चाहता था, जिससे कि भारत और भूटान इस मसले पर बंट जाए. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे मेनन ने पीएम मोदी की सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि सरकार ने इस मुद्दे को सही तरीके से संभाला.Also Read - चीन और उत्तर कोरिया की सैन्य गतिविधियों ने बढ़ाई चिंता, जापान ने भी बढ़ाया रक्षा बजट

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मेनन ने कहा कि देश की सीमा का ध्यान रखने के लिए सभी को एकजुट रहने की जरूरत है. शिवशंकर मेनन ने एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले साल हमने डोकलाम में जो कुछ देखा, वो इसलिए नहीं हुआ कि उनके (चीन) पास स्पष्ट सैन्य विकल्प या विशिष्टता थी बल्कि चीन भूटानियों को हमसे अलग करने की चाल चल रहा था. भारत और भूटान के करीबी संबंध हैं और भूटान को नई दिल्ली सैन्य समर्थन देता है. Also Read - The Summit for Democracy: बाइडेन ने लोकतंत्र पर चर्चा के लिए 110 देशों को बुलाया, India के सिर्फ दो पड़ोसी शामिल

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वर्ष 2010 से 2014 के बीच एनएसए रह चुके मेनन ने कहा कि भूटानियों को चीन दिखाना चाहता था कि भारत अपनी सुरक्षा खुद नहीं कर सकता है और इस पर उसने भूटान को भारत के खिलाफ उकसाने की भी कोशिश की. उन्होंने कहा कि भारत ने जिस तरह से प्रतिक्रिया दी उस पर उन्हें गर्व है. सीमा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं का जिक्र करते हुए मेनन ने कहा कि सैन्य बलों को ऐसे मुद्दों पर पूर्वोत्तर के राज्यों के सीमाई क्षेत्र के लोगों को भरोसे में लेना चाहिए. बता दें कि शिवशंकर मेनन 2006 से 2009 तक भारत के विदेश सचिव भी रहे हैं. अमेरिका के साथ ऐतिहासिक परमाणु करार में उनकी बेहद अमह भूमिका थी.

दूसरी तरफ सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कहा कि अब डोकलाम के हालात ठीक है और परेशान होने का कोई कारण नहीं है. नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने पिछले साल के डोकलाम गतिरोध पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि वास्तविक नियंत्रण रेखा के पार से चीनी सेना की बार-बार घुसपैठ और डोकलाम घटना चीन की बढ़ती दबंगई का एक संकेत है.

73 दिनों तक चला था डोकलाम विवाद

गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच डोकलाम विवाद 2017 के आखिरी दिनों में खत्म हुआ था. यह विवाद 73 दिनों तक चला था. दोनों देश डोकलाम से अपनी सेनाओं को पीछे हटाने के लिए तैयार हो गए थे. भारत ने उस समय इसे अपनी बड़ी जीत बताई थी. हालांकि चीन ने भी अपनी जीत का दावा करते हुए कहा था कि वह सीमा गश्त जारी रखेगा.