नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि के तौर भारत का निमंत्रण अस्वीकार कर दिया है. ट्रंप का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और भारत के रिश्तों में रूस से हथियारों की खरीद के चलते तनाव चल रहा है. रूस से डील के पहले तक कयास लगाए जा रहे थे कि ट्रंप 26 जनवरी को भारत आ सकते हैं, लेकिन बाद में अमेरिका का जैसा रुख रहा, उससे आशंका जताई जा रही थी कि ये दौरा रद्द हो सकता है. हालांकि ट्रंप ने अपनी व्यस्तता को वजह बताया है. माना जा रहा कि ट्रंप स्टेट ऑफ यूनियन को संबोधित करेंगेजो कि 22 जनवरी से फरवरी के पहले सप्ताह के बीच कभी भी हो सकता है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने इस संबंध में भारत के राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को एक पत्र सौंपा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी अमेरिका की यात्रा के दौरान ट्रंप को गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया था. इससे पहले 2015 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपनी तमाम व्यस्तताओं के बीच समय निकाल कर रिपब्लिक डे परेड में चीफ गेस्ट के तौर पर शामिल हुए थे.

गौरतलब है कि अमेरिका ने भारत, चीन सहित सभी देशों से ईरान से कच्चे तेल का आयात चार नवंबर तक बंद करने को कहा है. इस तिथि के बाद भी वहां से तेल मंगाने वाले वाले देशों के खिलाफ उसने आर्थिक प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है और कहा है कि इस मामले में रत्ती भर भी ढ़ील नहीं बरती जाएगी. भारत में इराक और सऊदी अरब के बाद सबसे ज्यादा कच्चा तेल ईरान से मंगाया जाता है. 2017-18 के पहले दस महीनों (अप्रैल-जनवरी) में ईरान से1.84 टन तेल आया था.

रूस के साथ एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीद प्रक्रिया से भी अमेरिका नाराज है. अमेरिका ने अनौपचारिक तौर पर इंडिया से कहा था कि वह ‘काउंटरिंग अमेरिका एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट’ (सीएएटीएसए) के तहत उसे छूट दे सकता है. अगर भारत उसे यह भरोसा दिलाए कि वह एफ -16 लड़ाकू विमान अमेरिका से ही खरीदेगा. हालांकि भारत ने अमेरिका को इस तरह का कोई आश्वासन देने से इंकार कर दिया है.