Trump Tarrifs: ईरान ट्रेड पर ट्रंप टैरिफ का भारत पर कितना पड़ेगा असर? केंद्र सरकार ने खुद दिया जवाब

अमेरिका की तरफ से ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर 25% टैरिफ लगाने के बाद पैदा हुई चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने साफ किया है कि इसका भारत पर सीमित असर पड़ेगा, क्योंकि भारत-ईरान व्यापार छोटा है और भारत के निर्यात विकल्प विविध हैं.

Published date india.com Published: January 13, 2026 11:22 PM IST
Trump Tarrifs: ईरान ट्रेड पर ट्रंप टैरिफ का भारत पर कितना पड़ेगा असर? केंद्र सरकार ने खुद दिया जवाब

Trump Tarrifs: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लागू करने की घोषणा की. इसके बाद भारत में कुछ निर्यातकों में बेचैनी देखी गई, खासकर उन कंपनियों में जो ईरान को बासमती चावल निर्यात करती हैं. भारत ईरान का सबसे बड़ा चावल आपूर्तिकर्ता है और ईरान अपनी लगभग दो-तिहाई बासमती चावल की जरूरत भारत से पूरी करता है.

हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस कदम का भारत के व्यापार पर बहुत सीमित प्रभाव पड़ेगा. भारत और ईरान के बीच कुल व्यापार पिछले साल केवल 1.6 अरब डॉलर था, जो ईरान के कुल आयात में केवल एक छोटा हिस्सा है. ईरान के मुख्य आयातक देशों में संयुक्त अरब अमीरात ($21 अरब), चीन ($17 अरब), तुर्की ($11 अरब) और यूरोपीय संघ ($6 अरब) शामिल हैं, जबकि भारत का हिस्सा काफी कम है.

केंद्र ने इसे लेकर क्या कहा?

केंद्र ने ये भी कहा कि भारत के व्यापार संबंध विविध हैं और अधिकांश निर्यातकों का ईरान पर निर्भरता सीमित है. ऐसे में 25% टैरिफ से व्यापारिक नुकसान का असर न्यूनतम रहेगा. इसके बावजूद कुछ निर्यातकों ने नए अनुबंधों पर हिचकिचाहट दिखाई है. कुछ निर्यातकों ने कहा कि हाल ही में भेजे गए चावल की भुगतान प्रक्रिया में देरी और ईरानी बाजार में विरोध प्रदर्शन उनकी चिंता का कारण हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप का यह कदम चीन के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है. चीन ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और ईरान के निर्यात का अधिकांश हिस्सा चीन को जाता है, जिसमें तेल प्रमुख है. विश्व बैंक के अनुसार 2022 में ईरान के 22 अरब डॉलर के निर्यात में से अधिकतर चीन को गए थे.

भारत के लिए राहत की बात यह है कि ईरान पर अमेरिका के प्रतिबंधों के चलते उसका तेल और अन्य उत्पादों का निर्यात कुछ चुनिंदा देशों तक ही सीमित है. इस स्थिति में भारत का व्यापार हिस्सा सीमित होने के कारण उसे ज्यादा जोखिम नहीं है.

सरकार का आश्वासन यह है कि भारतीय निर्यातकों को स्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए और नए बाजार विकल्पों की तलाश करनी चाहिए. कुल मिलाकर, ट्रंप के टैरिफ का प्रभाव भारत पर न्यूनतम होगा, लेकिन निर्यातक सतर्क हैं और व्यापारिक रणनीतियों में बदलाव की संभावना देख रहे हैं.

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