
Farha Fatima
फ़रहा फ़ातिमा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस से ग्रेजुएशन के बाद पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2015 में LIVE India में इंटर्नशिप से की. प्रारंभिक दौर में ही उन्होंने जामिया ... और पढ़ें
चेन्नई के 30 वर्षीय तानसेन दोनों हाथों से विकलांग है. तानसेन ने 10 साल की उम्र में एक विद्युत दुर्घटना में अपने दोनों हाथ खो दिए थे. वह अपनी मारुति स्विफ्ट कार अपने पैरों से चलाते हैं. अब उन्होंने ड्राइविंग लाइसेंस भी हासिल कर लिया है. वह विकलांग होते हुए भी ड्राइविंग लाइसेंस पाने वाले तमिलनाडु के पहले शख्स बन गए हैं. तानसेन ने बाधाओं को तोड़ते हुए एक उदाहरण पेश किया. उन्हें 22 अप्रैल 2024 को अपना ड्राइविंग लाइसेंस मिला. उन्होंने पेरम्बूर में अपनी पढ़ाई पूरी की और फिलहाल में एलएलएम कर रहे हैं.
लाइसेंस प्राप्त करने की उनकी इच्छा तब जगी जब उन्हें मध्य प्रदेश के एक व्यक्ति विक्रम अग्निहोत्री के बारे में पता चला, जिसने दोनों हाथ कटे होने के बावजूद वर्षों पहले लाइसेंस प्राप्त कर लिया था. केरल की एक महिला, जिलुमोल मैरिएट थॉमस भी लाइसेंस प्राप्त करने में सफल रहीं, जिससे तानसेन को और प्रेरणा मिली.
उन्होंने बताया, जब मैं 10 साल का था तो मेरे साथ एक दुर्घटना हुई और मैं विकलांगता का शिकार हो गया. मैंने अपनी डिग्री पूरी कर ली है. जब मैं 18 साल का हुआ, तो मेरे सभी दोस्तों को उनके लाइसेंस मिल गए. उस समय मुझे बहुत बुरा लगा. क्योंकि मैं लाइसेंस नहीं ले सका या कार नहीं चला सका. तब मैंने सोचा कि लाइसेंस प्राप्त करना मेरे लिए महत्वपूर्ण चीज है, मैंने मध्य प्रदेश से अग्निहोत्री सर के बारे में खबर सुनी उनसे भारत में बिना हाथों के लाइसेंस पाने के लिए मुझे प्रेरणा मिली. हाल ही में केरल में एक लड़की को भी लाइसेंस मिला.
गाड़ी चलाने के प्रति दृढ़ संकल्पित तानसेन ने बिना हाथों के अपने पैरों का उपयोग करके कार चलाना सीखना शुरू कर दिया. उन्होंने एक नई मारुति स्विफ्ट कार खरीदी, उसमें थोड़ा बदलाव किया और तीन महीने तक लगातार ट्रेनिंग की.
उन्होंने बताया, मैंने एक कार खरीदी और ड्राइविंग की कोशिश की, मेरा दाहिना पैर स्टीयरिंग व्हील पर था और मेरा बायां पैर ब्रेक और एक्सीलेटर पर था. तानसेन ने कहा, “मैंने 3 महीने तक ड्राइविंग की ट्रेनिंग ली, जिसके बाद मैं आरटीओ गया. आरटीओ ने मुझे लाइसेंस दे दिया. मैं लाइसेंस पाकर बहुत खुश हूं. तमिलनाडु में, मैं लाइसेंस पाने वाला ऐसा पहला व्यक्ति हूं. मुझे लगता है कि इसके बाद मेरे जैसे लोगों को बहुत आसानी से लाइसेंस मिल जाएगा.
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