
Shivendra Rai
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले शिवेन्द्र राय को हिंदी डिजिटल पत्रकारिता में 5 साल का अनुभव है. वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से इतिहास में एमए ... और पढ़ें
Defence Research and Development Organisation: भारतीय सेनाओं के लिए आधुनिक हथियार, तकनीक और उपकरण बनानी वाली देश के अग्रणी संस्थान डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने कमाल कर दिया है. एक संसदीय पैनल की रिपोर्ट में बताया गया है कि DRDO ने पिछले पांच सालों में देश के 2,64,156 करोड़ रुपये बचाए हैं. ऐसा देश में ही किए जा रहे शोध और अनुसंधान की वजह से संभव हो पाया है.
रक्षा मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने संसद में पेश की गई एक रिपोर्ट में यह भी कहा कि पिछले और इस साल में DRDO ने नेक्स्ट-जेनरेशन हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी और मिसाइलों को विकसित करने की दिशा में अहम कामयाबी हासिल की है.
संसदीय स्थायी समिति ने DRDO को उसकी उपलब्धियों के लिए बधाई दी और कहा कि यह एजेंसी देश की स्वदेशी रक्षा अनुसंधान और विकास क्षमताओं को मजबूत करने के लिए नई, जटिल और महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपनी यात्रा जारी रखेगी.
DRDO ने पिछले 5 सालों में देश के लिए कई जटिल रक्षा तकनीकों को विकसित करने में कामयाबी हासिल की है. हाइपरसोनिक सिस्टम, एयर डिफेंस (VSHORADS) और मिसाइल टेक जैसे क्षेत्रों में रिसर्च और डेवलपमेंट से DRDO ने देश को आत्मनिर्भर बनने में मदद की है. जरूरी रक्षा को देश में ही विकसित कर डीआरडीओ ने विदेशी मुद्रा भंडार को बाहर जाने से बचाया है.
डीआरडीओ ने कई अहम तकनीकें विकसित कर के इसे देश के निजी क्षेत्र को भी सौंपा है. इससे हथियारों और रक्षा उपकरणों के निर्माण में तेजी भी आई है. प्राइवेट इंडस्ट्री के लिए परीक्षण सुविधाएं खोलने और घरेलू स्टार्टअप के साथ सहयोग करने से देश में एक डिफेंस इकोसिस्टम का विकास हुआ है. इससे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता भी मजबूत हुई है.
डीआरडीओ ने भारत के लिए मिसाइलें, टैंक, वायु रक्षा प्रणालियां, लड़ाकू विमान और क्लोज कॉम्बैट कार्बाइन जैसे कई स्वदेशी हथियार विकसित किए हैं. अग्नि और पृथ्वी जैसी बैलिस्टिक मिसाइलें, सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस, हवा से हवा में मार करने वाली अस्त्र, टैंक-रोधी नाग और हेलीना, आकाश और बराक-8 जैसे एयर डिफेंस सिस्टम, तेजस लड़ाकू विमान और अर्जुन टैंक जैसे महत्वपूर्ण हथियार DRDO की ही देन हैं.
भारत के लिए पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान, हाइपरसोनिक मिसाइल, प्रोजेक्ट कुशा एयर डिफेंस, पिनाका गाइडेड रॉकेट लॉन्चर के नए वर्जन, नेवी के लिए नए जमाने की तकनीक और 300 किलोमीटर रेंज वाली हवा से हवा में मार करने वाली अस्त्र मार्क-3 मिसाइल को जल्द से जल्द विकसित करने के लिए भी डीआरडीओ की प्रयोगशालाओं में लगातार काम हो रहा है.
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