नई दिल्लीः दिल्ली अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) की ओर से शनिवार को आयोजित परीक्षा में बेहद ही आपत्तिजनक जाति आधारित सवाल पूछे गए हैं. इसको लेकर बवाल पैदा हो गया है. डीएसएसएसबी ने अपनी सफाई में इसे ‘असावधानी से हुई गलती’ करार दिया है वहीं दिल्ली सरकार ने इसको लेकर सीधे राज्यपाल को कटघरे में खड़ा किया है. दिल्ली के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने हुई एक परीक्षा में ‘जातीय और नारीद्वेषी प्रश्न’ पूछे जाने पर डीएसएसएसबी के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. Also Read - Sarkari Results 2020: DSSSB PRT Result 2020 Declared: DSSSB ने जारी किया प्राइमरी असिस्टेंट टीचर का रिजल्ट, ऐसे करें चेक

रविवार को एक बयान में दिल्ली के अनुसूचित जाति/जनजाति मंत्री ने इस मुद्दे पर गंभीर चिंता प्रकट की और कहा कि वह मुख्य सचिव अंशु प्रकाश से डीएसएसएसबी के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई करने को कहेंगे. यह परीक्षा शनिवार को हुई थी. मंत्री ने आरोप लगाया, ‘कथित प्रश्न कल हुई परीक्षा के हिंदी खंड में पूछा गया था. उसमें ब्राह्मणवादी समाज की जाति आधारित व्यवस्था को इंगित करते हुए चार विकल्प थे. यह बहुविकल्पीय प्रश्न था और उत्तर बहुत ही जातिवादी एवं लैंगिक असंवेदनशील तरह के थे.’ Also Read - DSSSB PGT & TGT Teacher Recruitment 2020 DSSSB में विभिन्न विषयों के शिक्षकों के पदों पर निकली वैकेंसी, इस प्रोसेस से करें आवेदन

बयान के अनुसार, मंत्री ने कहा कि उपराज्यपाल के तहत आने वाला सेवा विभाग डीएसएसएसबी का शासी निकाय है. उन्होंने कहा कि विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किस वजह से उन्होंने ऐसा ‘‘घटिया’’ सवाल शामिल किया. बयान में कहा गया है, ‘‘महिलाओं का घोर अपमान करने के साथ समुदाय की भावनाओं को स्पष्ट रूप से आहत करने वाला जाति-आधारित सवाल शामिल करना डीएसएसएसबी का संचालन कर रहे लोगों की मानसिक स्थिति को दर्शाता है.’’ मंत्री ने कहा कि वह इस मुद्दे की अंतरिम जांच की मांग करने के लिए सोमवार को मुख्य सचिव से बात करेंगे.

डीएसएसएसबी ने एक बयान में कहा कि ‘‘असावधानी से हुई गलती’’ के कारण यह ‘‘जातिवादी’’ प्रश्न पूछा गया. बयान में कहा गया है, ‘‘यह स्पष्ट किया जाता है कि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया अत्यधिक गोपनीय होती है और प्रश्नपत्र की सामग्री बोर्ड के अधिकारियों के साथ साझा नहीं की जाती. प्रश्नपत्र पहली बार केवल अभ्यर्थियों के समक्ष ही आता है.’’ इसमें कहा गया है कि समाज के किसी भी वर्ग की भावनाओं को अनजाने में आहत करने वाला ऐसा कोई भी सवाल अत्यंत खेदजनक है. डीएसएसएसबी ने कहा कि मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान इस सवाल का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा. उसने कहा, ‘‘बोर्ड प्रश्नपत्र बनाने वालों को और अधिक संवेदनशील बनाने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठा रहा है और यह सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाया जा रहा है कि भविष्य में फिर ऐसी घटना ना हो.’’

(इनपुट-भाषा)