नई दिल्ली: दिल्ली में अगर आप डीटीसी की बसों से यात्रा करते हैं तो परेशानी झेलनी पड़ सकती है. दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) कर्मचारियों की यूनियनें सोमवार को हड़ताल कर रही है. डीटीसी के ठेका कर्मचारी डीटीसी संविदा श्रमिक संघ के बैनर तले सोमवार से हड़ताल पर हैं. उनकी मांगों में उस भत्ते को भी बहाल करना शामिल है जिसे एक अदालत के आदेश के बाद डीटीसी ने कम कर दिया था. डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर ने भी सोमवार को हड़ताल पर जाने का आह्वान किया है. इस बीच डीटीसी ने एक प्रेस बयान में कहा,‘दिल्ली सरकार ने न्यूनतम वेतन दरों को बहाल किया था जो ठेका कर्मचारियों के लिए चार अगस्त, 2018 से पहले लागू थी और न्यूनतम वेतन को कम करने के आदेश वापस ले लिये थे. डीटीसी ने ठेका कर्मचारियों से जल्द से जल्द अपने काम पर लौटने की अपील की है.

वहीं दूसरी ओर दिल्ली परिवहन निगम के ठेका कर्मचारियों की हड़ताल रोकने के लिए उप राज्यपाल अनिल बैजल ने आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (एस्मा) लगा दिया है. एक सरकारी अधिकारी ने इसकी जानकारी दी. डीटीसी के कर्मचारी ऐसे समय में हड़ताल पर जा रहे हैं जब दिल्ली में प्रदूषण बढ़ा है. डीटीसी के 11286 ठेके पर काम करने वाले ड्राइवर और कंडक्टर ने हड़ताल पर जाने का एलान किया है. डीटीसी में 25 हजार स्थायी कर्मचारी और लगभग 11380 ठेके पर काम करने वाले कर्मचारी हैं.

डीएससी श्रमिक संघ के सलाहकार राजा राम त्यागी का कहना है कि संविदा पर काम करने वाले कर्मचारी 22 अक्टूबर से हड़ताल पर हैं लेकिन किसी ने उनसे बातचीत करने की कोशिश नहीं की. ये कर्मचारी 25 प्रतिशत सैलरी कम करने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं. आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (एस्मा) लगाने का मतलब है कि सरकार हमसे कोई बातचीत नहीं करना चाहती. आम आदमी पार्टी (आप) ने चुनाव के दौरान वादा किया था कि वे संविदाश्रमिकों को नियमित करेंगे, लेकिन, अब तक कुछ नहीं हुआ है.

अनुबंध चालकों के मुताबिक, दो महीने पहले उन्हें 7.10 रुपये प्रति किलोमीटर का भुगतान किया जा रहा था, जो अब 5.5 रुपये प्रति किलोमीटर कर दिया गया है. ब्रेक-डाउन के मामले में, हमें प्रति दिन 648 रुपये मिलते थे जो प्रति दिन 481 रुपये कर दिया गया है. ठेके पर काम करने वाले ड्राइवर राजेश चोपड़ा का कहना है कि उन्हें पानीपत से 4:25 बजे स्थानीय ट्रेन लेना पड़ता है ताकि उत्तरी दिल्ली के बांदा बहादुर मार्ग (बीबीएम) डिपो तक पहुंच सकें. यहां तककि 6 बजे डिपो पहुंचने के बाद भी उन्हें नहीं पता होता है कि उन्हें उस दिन ड्यूटी मिलेगी कि नहीं. अगर एक दिन में 100 ड्राइवरों की आवश्यकता होती है, तो डीटीसी 120 ड्राइवरों को कॉल करता है. अगर उस दिन बस चलाने को नहीं मिला तो उनकी ड्यूटी को काउंट नहीं किया जाता है और पेमेंट भी नहीं मिलता.