नई दिल्ली. आर्थिक रूप से पिछड़े हुए पाकिस्तान को दिल खोलकर मदद देने वाला पड़ोसी देश चीन, पुलवामा आतंकी हमला मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाक का साथ देने को लेकर बैकफुट पर आ गया है. दरअसल, ड्रैगन देश ने साजिश की थी कि पुलवामा हमले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) द्वारा त्वरित बयान जारी नहीं किया जा सके. इसके लिए वह सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का लगातार विरोध करता रहा. लेकिन चीन की यह नापाक चाल कामयाब नहीं हो पाई. एक हफ्ते की देरी से ही सही, सुरक्षा परिषद ने बयान जारी कर दिया और चीन बेनकाब हो गया. आतंकवाद के किसी भी उल्लेख को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन के एकमात्र विरोध के परिणामस्वरूप पुलवामा आतंकी हमले के संबंध में बयान जारी करने में लगभग एक सप्ताह की देरी हुई. आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को यहां यह जानकारी दी.

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सूत्रों ने कहा कि सुरक्षा परिषद के फैसले की औपचारिक ड्राफ्टिंग प्रक्रिया शुरू करने या उसकी अध्यक्षता करने की जिम्मेदारी निभाने वाले की हैसियत से अमेरिका ने परिषद के अन्य सभी सदस्यों का अनुमोदन हासिल करने के लिए विभिन्न समायोजन करते हुए पूरा प्रयास किया. चीन पुलवामा पर 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद के बयान की विषय वस्तु को कमजोर करना चाहता था. वहीं पाकिस्तान ने प्रयास किया कि कोई बयान जारी नहीं हो. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की स्थाई प्रतिनिधि मलीहा लोधी ने सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष से भी मुलाकात की लेकिन उनके प्रयासों का कोई परिणाम नहीं निकला. बीते गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पाकिस्तानी आतंकवादी समूह जैश-ए-मोहम्मद के 14 फरवरी के “जघन्य और कायरतापूर्ण” आतंकवादी हमले की तीखी निंदा की.

इस मामले पर कूटनीतिक तकरार का विवरण देते हुए सूत्रों ने कहा कि पुलवामा पर सुरक्षा परिषद का बयान 15 फरवरी की शाम को जारी किया जाना था, लेकिन चीन ने बार-बार समय बढ़ाने की मांग की. उन्होंने कहा कि चीन ने 18 फरवरी तक विस्तार का अनुरोध किया, जबकि बाकी 14 सदस्य देश 15 फरवरी को ही इसे जारी करने के लिए तैयार थे. उन्होंने कहा कि चीन ने कई संशोधनों का सुझाव दिया ताकि प्रयास को ‘‘पटरी से उतारा’’ जा सके. संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में इस मुद्दे पर हुई कूटनीतिक चर्चा से वाकिफ एक व्यक्ति ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा पुलवामा हमले की “आतंकवाद” के रूप में निंदा किए जाने के बाद भी चीन ने बयान में आतंकवाद के किसी भी उल्लेख का विरोध जारी रखा.

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चीनी और पाकिस्तानी प्रयासों के बावजूद, सुरक्षा परिषद ने जम्मू कश्मीर में भारतीय जवानों पर हमले के संबंध में अपने इतिहास में पहला बयान जारी करने पर सहमति व्यक्त की. भारत ने आतंकी समूहों और सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने के लिए पाकिस्तान को अलग-थलग करने की खातिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में राजनयिक प्रयास तेज कर रखा है. आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में बीते 14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ था. इसमें 40 से ज्यादा जवान शहीद हो गए.

(इनपुट – एजेंसी)