नई दिल्ली: दिवाली से पहले ही राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का प्रकोप अपने चरम पर है. सर्दी के मौसम में हवा ज्यादा दूषित होती है जिसकी वजह से हवा में धुंध का आसार बढ़ जाता है. दिल्ली के कई इलाकों में पिछले कुछ दिनों से वायु की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ की श्रेणी में दर्ज किया जा रहा है. दिल्ली एनसीआर में रविवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air quality index) 245 पर पहुंच गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है. दिल्ली में वायु प्रदूषण के लिहाज से संवेदनशील माने गए आनंद विहार और बवाना सहित कुछ अन्य इलाकों में सूचकांक 300 अंक को पार कर गया, जिसे ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रखा जाता है.

बताया जा रहा है कि दिल्ली में इस प्रदूषण का कारण पंजाब से आती हवाएं हैं. पंजाब क्षेत्र का एक बहुत बड़ा हिस्सा इस समय वायु प्रदूषण का मार झेल रहा है. जिसके फलस्वरूप उसके अगल बगल के क्षेत्रों में भी इसका बुरा असर पड़ रहा है. पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर (पीआरएससी) द्वारा रविवार को ठूंठ में आग लगाने की 117 घटनाओं का पता लगाया गया और एक दिन पहले ऐसी 76 घटनाएं हुईं. पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (PPCB) के आंकड़ों से खेत में आग लगने की घटनाओं में 45 फीसदी का इजाफा हुआ है. पिछले साल 11 अक्टूबर तक पाई गई 435 घटनाओं की तुलना में इस साल इसी अवधि में 630 घटनाएं दर्ज की गई हैं.

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इतनी मात्रा में खेतों को जलाना, ठूंठ में आग लगाना वायु को प्रदूषित करने के लिए काफी है. शनिवार को, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पड़ोसी राज्यों में पराली के जलने से निकलने वाला धुआं दिल्ली पहुंचने लगा है और हवा की गुणवत्ता खराब होने लगी है.

उन्होंने कहा, ‘‘व्यापक रूप से यह बात सामने आई है कि दिल्ली में आने वाला धुआं हरियाणा के करनाल में पराली जलने के कारण आता है.’’ केंद्र सरकार द्वारा संचालित वायु गुणवत्ता एवं मौसम पूर्वानुमान और अनुसंधान प्रणाली (सफर) ने कहा कि पराली जलाने से निकलने वाला धुआं 15 अक्टूबर तक दिल्ली के प्रदूषण का छह फीसदी हिस्सा बन जाएगा. दिल्ली में वायु प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार कई उपाय करने की तैयारी में है.

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