बेंगलुरु: कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस- जद (एस) गठबंधन 16 विधायकों के इस्तीफे के बाद सरकार पर खतरे के बादल मंडराने के बावजूद मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी इस्तीफा देने को तैयार नहीं है. कुमारस्वामी ने उनके इस्तीफे की तमाम अटकलों को खारिज करते हुए मीडियाकर्मियों से कहा, मैं इस्तीफा क्यों दूं? मुझे इस्तीफा देने की क्या जरूरत है? उन्होंने 2009-10 के उस वाकये की याद दिलाई, जब कुछ मंत्रियों सहित 18 विधायकों ने बीजेपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा का विरोध किया था, लेकिन उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया था. बता दें कि कर्नाटक विधानसभा का मानसून सत्र 12 जुलाई से शुरू होगा.

कांग्रेस के दो और विधायकों के बुधवार को इस्तीफा देने के बाद मुख्यमंत्री ने गुरुवार को कांग्रेस के सीनियर नेताओं से भी बातचीत की. अभी तक 16 विधायक इस्तीफे सौंप चुके हैं. इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कनार्टक के कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन के 10 बागी विधायकों को शाम छह बजे विधानसभा अध्यक्ष से मिलने की अनुमति दे दी . साथ ही न्यायालय ने विधानसभा अध्यक्ष को उनके इस्तीफे पर आज ही फैसला करने का निर्देश भी दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कर्नाटक में कांग्रेस-जद (एस) के 10 बागी विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष से शाम छह बजे मुलाकात करने और इस्तीफा देने के अपने निर्णय से अवगत कराने की अनुमति प्रदान कर दी. वहीं, विधायकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि कर्नाटक व‍िधानसभा में विचित्र स्थिति है जहां 15 विधायक इस्तीफा देना चाहते हैं, लेकिन अध्यक्ष उनके इस्तीफे स्वीकार नहीं कर रहे हैं.

सीजेआई रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष से कहा कि वह इन विधायकों के इस्तीफे के बारे में आज ही निर्णय लें. पीठ ने कहा कि अध्यक्ष द्वारा लिए गए फैसले से शुक्रवार को अवगत कराया जाए, जब न्यायालय इस मामले में आगे विचार करेगा. शीर्ष अदालत ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया कि इन बागी विधायकों के मुंबई से बेंगलुरू पहुंचने पर इन्हें एयरपोर्ट से विधानसभा तक सुरक्षा प्रदान की जाए.

रोहतगी ने कहा कि छह जुलाई को जब कुछ बागी विधायक अपने त्यागपत्र देने गए तो अध्यक्ष पिछले दरवाजे से अपने कार्यालय सेबाहर चले गए. उन्होंने कहा कि एक बागी विधायक से उस समय मारपीट की गई, जब उसने बुधवार को अध्यक्ष के कार्यालय तक पहुंचने का प्रयास किया. रोहतगी ने कहा कि राज्य विधानसभा का सत्र 12 जुलाई से शुरू हो रहा है लेकिन उससे पहले ही सत्तारूढ़ गठबंधन ने इन बागी विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए अध्यक्ष के समक्ष आवेदन दायर किया है.

मामले की सुनवाई शुरू होते ही पीठ ने स्पष्ट किया कि वह सिर्फ उन 10 विधायकों के मामले में आदेश पारित कर रही है जो हमारे सामने हैं, अन्य के लिए नहीं. शीर्ष अदालत में याचिका दायर करने वाले विधायकों में प्रताप गौड़ा पाटिल, बी सी पाटिल, रमेश जारकिहोली, ए शिवराम हब्बर, एस टी सोमशेखर, महेश कुमातल्ली, के गोपालैया, नारायण गौडा, अडगुर एच विश्वनाथ शामिल हैं.

अगर बागी विधायकों के इस्तीफे स्वीकार किए जाते हैं, तो सत्तारूढ़ गठबंधन बहुमत गंवा सकता है. 224 सदस्यीय विधानसभा में अध्यक्ष को छोड़कर गठबंधन विधायकों की कुल संख्या 116 (कांग्रेस-78, जेडीएस-37 और बसपा-1) है.

कर्नाटक विधानसभा के 13 सदस्यों – कांग्रेस के 10 और जद(एस) के तीन- ने छह जुलाई को सदन की सदस्यता से अपने-अपने त्यागपत्र विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय को सौंपे थे. इसके साथ ही राज्य में कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन सरकार के लिए राजनीतिक संकट पैदा हो गया था.