संयु्क्त राष्ट्र। भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र की 72वीं जनरल असेंबली में अपना भाषण देते हुए पाकिस्तान को एकबार फिर बेकनकाब किया है. उन्होंने अपने 22 मिनट के भाषण में आतंकवाद, समुद्री पलायन, गरीबी, बेरोजगारी और जलवायु परिवर्तन का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि हम गरीबी से लड़ रहे हैं लेकिन पाकिस्तान हमसे लड़ रहा है. यह दूसरा मौका है जब सुषमा स्वराज महासभा में हिंदी में भाषण दिया.
उन्होंने भाषण की शुरुआत नमस्कार से किया. उसके बाद कहा मैंने पिछले साल भी भाषण दिया था. इस दौरान कई परिवर्तन देखने को मिले हैं. उन्होंने आतंकवाद, समुद्री पलायन, गरीबी और बेरोजगारी का मुद्दा उठाया. इसके अलावा साइबर सुरक्षा के खतरों पर ध्यान दिलाया. उन्होंने कहा कि हमारी ज्यादातर योजनाएं गरीबों के सश्क्तिकरण के लिए चलाई जा रही है. जनधन योजना से 30 करोड़ लोगों को बैंको से जोड़ा. मुद्रा योजना, स्किल इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया योजना.
सुषमा स्वराज ने कहा हम गरीबी से लड़ रहे हैं लेकिन पाकिस्तान हमसे लड़ रहा है. जो मुल्क हैवानियत के हदें पार करता वो हमें इंसानियत का पाठ पढ़ा रहा है. जिन्ना ने शांति या दोस्ती की नीयत दी इसका तो पता नहीं लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जरूर दोस्ती का हाथ बढ़ाया था.
उन्होंने कहा भारत और पाकिस्तान साथ-साथ आज़ाद हुए थे लेकिन भारत की पहचान सुपर आईटी पार्क के रूप में बनी है लेकिन पाकिस्तान की पहचान आतंकवादी मुल्क के रूप में बनी है. इसका कारण है कि भारत ने आतंकवाद से लड़ते हुए अपने विकास की गति को बनाए रखा. लेकिन पाकिस्तान ने आतंकी संगठन और कैंप बनाए हैं. जो पैसा आतंकियों के लिए खर्च कर रहे हो वो पैसा आवाम की भलाई पर खर्च करो.
Pak PM has recalled old resolutions that have been long overtaken by events.But his memory has conveniently failed him where it matters: EAM pic.twitter.com/UiPGSy6284
— ANI (@ANI) September 23, 2017
भारत की विदेश मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र आज जिन समस्याओं का समाधान ढूंढ रहा है उसमें सबसे बड़ी समस्या आतंकवाद है. लेकिन संयुक्त राष्ट्र का लचर रवैया ठीक नहीं है. आतंकियों को जल्द से जल्द परिभाषित किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि सम्मेलन शुरू होने के कुछ दिनों पहले दुनिया भर में आपदाएं आना शुरू हो गई. ये हमारे लिए एक चेतावनी है. विकसित देशों को अविकसित देशों की मदद करना चाहिए. भारत जलवायु परिवर्तन के संबंध में बेहद गंभीर है.
आखिर में उन्होंने कहा कि विषय तो अनेक हैं लेकिन लोगों को सभ्य और शांतिपूर्वक जीवन की . हम वसुधैव कुटुंबकम कहते हैं. इसीलिए हम सिर्फ अपने सुख की कामना नहीं बल्कि सभी के सुख की कामना करते हैं…
‘सर्वे भवंति सुखिनः, सर्व संतु निरामया, सर्व भद्राणि पश्यंतु, मा कश्चिद दुख भाग भवेत’
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाक को कहा था ‘टेररिस्तान’
इससे पहले भारत ने सयुंक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के झूठ पर उसे कड़ा संदेश दिया था. इंडियन डिप्लोमेट ईनम गंभीर ने संयुक्त राष्ट्र में पाक को साफ संदेश देते हुए कहा कि वो ये समझ ले कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, पाकिस्तान अब आतंक का दूसरा नाम बन चुका है. वहां आतंकी फलते फूलते हैं. उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान अब टेररिस्तान बन चुका है. ईनम का ये वाक्य सुनकर वहां बैठे पाकिस्तानी प्रतिनिधि बगले झांकने लगे और थोड़ा असहज हो गए.

संयुक्त राष्ट्र में जनरल असेंबली का दृश्य (एएनआई)
2016 में सुषमा स्वराज के भाषण की खास बातें…
सुषमा ने 2016 में यूएन में कहा था, “अगर कोई देश आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में शामिल नहीं होना चाहता, तो हम उसे अलग-थलग कर दें. उन्होंने पाकिस्तान पर हमला बोलते हुए कहा कि आतंकवाद को बढावा देने वाले मुल्क से कोई वास्ता नहींं रखना चाहिए.
पाक द्वारा कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने पर सुषमा बोलीं, ‘मैं कहना चाहूंगी कि जिनके अपने घर शीशे के हों, उन्हें दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए. जरा एक बार बगल में झांककर देख लें कि बलूचिस्तान में क्या हो रहा है और वो खुद क्या कर रहे हैं वहां. जो बलूचिस्तान में हो रहा है, वो यातनाओं की पराकाष्ठा है.’
सुषमा स्वराज ने कहा भारत ने दोस्ती का हाथ बढ़ाया लेकिन बदले में धोखा मिला. हमारी मित्रता सहजता की ओर जा रही थी। कभी ईद की शुभकामनाएं, कभी क्रिकेट की शुभकामनाएं, कभी स्वास्थ्य का हालचाल। लेकिन, मित्रता के बदले हमें क्या मिला? पठानकोट, उड़ी, बहादुर अली?
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