कंबल-रजाई और स्वेटर के लिए दिसंबर तक नहीं करना होगा इंतजार, इस साल नवंबर में ही पड़ेगी कड़ाके की ठंड, IMD ने दिया बड़ा अपडेट

IMD के मुताबिक पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र, हिमालय की तलहटी, पूर्वोत्तर भारत के ज्यादातर हिस्से और दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ हिस्सों में मैक्सिमम टेंपरेचर सामान्य से ज्यादा रहेगा. हालांकि, उत्तर-पश्चिम के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर ज्यादातर क्षेत्रों में नॉर्मल से ज्यादा मिनिमम टेंपरेचर रहने का अनुमान है.

Published date india.com Published: October 31, 2025 10:40 PM IST
कंबल-रजाई और स्वेटर के लिए दिसंबर तक नहीं करना होगा इंतजार, इस साल नवंबर में ही पड़ेगी कड़ाके की ठंड, IMD ने दिया बड़ा अपडेट
ला नीना भारत में अक्सर ज़्यादा ठंड और बारिश का कारण बनता है.

दिवाली के बाद मौसम में तेजी से बदलाव आया है. रातें अभी से सर्द होने लगी हैं. पहाड़ों में शुरुआती बर्फबारी के बाद दिल्लीNCR समेत कई राज्यों में तापमान में गिरावट भी आई है. आमतौर पर दिसंबर से कड़ाके की ठंड पड़ती है. लेकिन, भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा अपडेट के मुताबिक, अब कंबल-रजाई और स्वेटर-जैकेट निकालने के लिए आपको दिसंबर तक का इंतजार नहीं करना पड़ेगा. नवंबर से ही अच्छी-खासी सर्दी पड़ने का अनुमान जताया गया है.

IMD जनरल डायरेक्टर मृत्युंजय महापात्र ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में देश के ज्यादातर हिस्सों में नवंबर में ही मैक्सिमम टेंपरेचर नॉर्मल से कम रहने का अनुमान जताया है. उत्तर-पश्चिम, मध्य और पश्चिमी भारत समेत देश के बड़े हिस्से में नवंबर में रातें और सुबह सर्द होने वाली हैं. हालांकि, उत्तर-पश्चिम के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर ज्यादातर क्षेत्रों में नॉर्मल से ज्यादा मिनिमम टेंपरेचर रहने का अनुमान है. IMD के मुताबिक पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र, हिमालय की तलहटी, पूर्वोत्तर भारत के ज्यादातर हिस्से और दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ हिस्सों में मैक्सिमम टेंपरेचर सामान्य से ज्यादा रहेगा.

ला नीना पड़ रहा कमजोर
IMD जनरल डायरेक्टर मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में ला नीना कमजोर पड़ रहा है. ला नीना की ये स्थिति दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 तक ऐसे ही बने रहने का अनुमान है.

ला नीना क्या होता है?
ला नीना प्रशांत महासागर में एक मौसम पैटर्न है. इसमें समुद्र की सतह का तापमान औसत से ज़्यादा ठंडा हो जाता है. इस दौरान पूर्वी हवाएं तेज़ हो जाती हैं. इससे भूमध्य रेखा के पास प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज़्यादा ठंडा हो जाता है. इसका असर दुनिया भर के मौसम पर पड़ता है. ला नीना भारत में अक्सर ज़्यादा ठंड और बारिश का कारण बनता है.

ला नीना इफेक्ट की वजह से बारिश होने का अनुमान
IMD ने ला नीना इफेक्ट की वजह से बारिश होने का अनुमान जताया है. उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर नवंबर में सामान्य से कम बारिश होने की भी उम्मीद है. वहीं, देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से ज्यादा बारिश होने का अनुमान है. महापात्र ने बताया कि भारत में अक्टूबर में 112.1 mm बारिश हुई. ये सामान्य से 49% ज्यादा है.

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रविवार को दिल्ली में रही दो साल में अक्टूबर की सबसे ठंडी सुबह
रविवार यानी 26 अक्टूबर को राजधानी में पिछले 2 सालों में अक्टूबर का सबसे कम मिनिमम टेंपरेचर दर्ज किया गया. मौसम विभाग के मुताबिक, रविवार को दिल्ली का मिनिमम टेंपरेचर सामान्य से 1.4 डिग्री कम 15.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. ये इस मौसम का अब तक का सबसे कम टेंपरेचर है. ये पिछले दो सालों में सबसे कम टेंपरेचर भी है. अक्टूबर 2024 में यह 17.4 डिग्री सेल्सियस तक गया था. हवा में नमी का स्तर भी 94 से 33% रहा.

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