शिमलाः हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार भूकंप आया है. शुक्रवार दोपहर 1:42 बजे आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्कैल पर 3.8 मापी गई. आज ही दुनिया में इस सदी का सबसे बड़ा चंद्रग्रहण लगाने वाला है. अपेक्षाकृत यह काफी कम तीव्रता का भूकंप है. इस कारण जानमाल के नुकसान की आशंका नहीं है.

इससे पहले कांगड़ा में ही 25 जुलाई यानी बुधवार को शाम में कम तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. उसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 2.9 मापी गई थी. मौसम विभाग ने बताया था कि भूकंप का केंद्र 10 किमी गहराई में था. भूकंप के झटके पूरे कांगड़ा जिले में महसूस किए गए थे.

ज्योतिष में सूर्य ग्रहण और चंद्रग्रहण दोनों को अशुभ माना जाता है. ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद मिश्र के अनुसार ऐसा पूर्ण चंद्रग्रहण लगभग 105 साल के बाद आया है. इसे खग्रास चंद्रग्रहण कहा जाता है. इस खगोलीय घटना का असर पृथ्वी पर भी होता है. इसके प्रभाव से भूकंप और प्राकृतिक आपदाओं का खतरा रहता है.

इसी साल 31 जनवरी को आने वाले चंद्रग्रहण के दिन भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. हालांकि विज्ञान की मानें तो पृथ्वी के सतहों में मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों के आपस में टकराने से भूकंप आता है. जबकि ज्योतिष ये मानते हैं कि ऐसा ग्रहण के प्रभाव के कारण होता है. ग्रहण के प्रभाव के कारण ही टेक्टोनिक प्लेटें टकराती हैं और भूकंप आता है.

यह भी मान्यता है कि चंद्रग्रहण के दौरान समुद्र सबसे ज्यादा प्रभावित होता है. इसलिए भूकंप के अलावा जल से जुड़ी जो कुछ भी आपदा है, जैसे कि बाढ़, सुनामी, चक्रवात आदि आती है. पंडित विनोद मिश्र के अनुसार पृथ्वी और चंद्रमा के पास आने के कारण भूगर्भीय हलचल बढ़ जाती है, इसके कारण ही आपदाएं आती हैं. आज लगने वाला चंद्रग्रहण अत्यंत प्रभावी स्थिति खग्रास चंद्रग्रहण है. इसके आगे पीछे की अमावस्या 13 जुलाई और 11 अगस्त को खंडग्रास सूर्यग्रहण होने के कारण भी इसका प्रभाव और भी बढ़ गया है. आज का चंद्रग्रहण पृथ्वी के लिए बड़ी भौगोलिक घटनाओं की संभावनाओं से भरे हो सकते हैं.