नई दिल्ली: मुंबई में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को एक विशेष अदालत में विजय माल्या के वकील से सवाल किया कि कौन 300 बैग लेकर किसी मीटिंग में में भाग लेने जाता है? ईडी ने इस दावे को खारिज कर दिया कि शराब कारोबारी मार्च, 2016 में जिनेवा में एक कार्यक्रम में भाग लेने गए थे और वह भागे नहीं गए थे. माल्या के वकील अमित देसाई ने मंगलवार को मनी लांड्रिंग रोधक कानून (पीएमएलए) से जुड़े मामलों के विशेष जज एम एस आजमी ने दावा किया था कि उनके मुवक्किल गुपचुप तरीके से देश छोड़कर नहीं गए थे.Also Read - बॉलीवुड एक्‍ट्रेस नोरा फतेही को लग्जरी कार गिफ्ट में दी थी, ठगी के आरोपी सुकेश चंद्रशेखर का दावा

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उन्होंने कहा कि वह गुपचुप तरीके से नहीं गए थे. वह स्विट्जरलैंड के जिनेवा में पहले से तय वर्ल्ड मोटर स्पोर्ट की बैठक में भाग लेने गए थे. हालांकि, ईडी के वकील डी एन सिंह ने देसाई के दावे को गलत बताया. उन्होंने कहा, ‘उनके पास ऐसा दिखाने के लिए कुछ भी नहीं है जिससे पता चलता हो कि वह बैठक में भाग लेने भारत से बाहर गए थे. कौन बैठक में भाग लेने के लिए 300 बैग और भारी मात्रा में सामान लेकर जाता है.

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गौरतलब है कि भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या को सोमवार को ब्रिटेन की अदालत ने करारा झटका देते हुए उन्हें भारत के हवाले करने की अनुमति दी है. अदालत ने कहा कि तड़क-भड़क की जिंदगी जीने वाले इस अरबपति कारोबारी ने अपने वित्तीय लेनदेन का काफी ‘गलत ब्योरा दिया’ और बैंकों के कर्ज का दूसरे कामों में इस्तेमाल किया.

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इस समय ब्रिटेन में रह रहे 62 वर्षीय माल्या पिछले साल अप्रैल में प्रत्यर्पण वॉरंट पर गिरफ्तारी के बाद से जमानत पर चल रहे हैं. उन पर भारतीय बैंकों का 9,000 करोड़ रुपये बकाया है और साथ ही किंगफिशर एयरलाइन के लिए बैंकों से कर्ज में हेराफेरी और मनी लांड्रिंग का भी आरोप है. यह एयरलाइन बंद हो चुकी है.

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माल्या ने अपने आप को भारत के हवाले किए जाने को चुनौती दी थी और यह बहुचर्चित मामला वहां करीब एक साल चला. माल्या ने दलील दी थी कि उन्होंने बैंकों के साथ कोई हेराफेरी या चोरी नहीं की है. उन्होंने दिन में कहा था कि उनकी भारतीय बैंकों को मूल राशि लौटाने की पेशकश ‘फर्जी’ नहीं है. कोर्ट का फैसला आने से पहले माल्या ने कहा था कि कर्ज निपटाने की मेरी पेशकश कर्नाटक हाईकोर्ट के समक्ष की गई है. प्रत्यर्पण मुकदमे से उसका संबंध नहीं है.

(इनपुट-भाषा)