नई दिल्ली| प्रवर्तन निदेशालय ने आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव की बेटी और राज्यसभा सांसद मीसा भारती और उनके पति शैलेश कुमार का फार्महाउस सील कर दिया है. यह फार्महाउस दिल्ली के बिजवासन में है. मनी लांड्रिग एक्ट के तहत इसे सील किया गया है. बताया जा रहा है कि इस फॉर्म हाउस की कीमत करीब 30 से 40 करोड़ रुपए है. फार्म हाऊस मिशेल कंपनी के नाम पर खरीदा गया था.

केंद्रीय जांच एजेंसी ने कहा कि फार्महाउस मीसा और उनके पति शैलेश कुमार का है और ‘‘मेसर्स मिशैल पैकर्स एंड प्रिंटर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर है. ईडी ने आरोप लगाया कि इसे धनशोधन में शामिल 1.2 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर 2008-09 में खरीदा गया था. एजेंसी ने साथ ही मुखौटा कंपनियों का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये का शोधन करने के आरोपी दो भाइयों, सुरेंद्र कुमार जैन और वीरेंद्र जैन के खिलाफ अपनी जांच के तहत इस फार्महाउस और कुछ अन्य जगहों पर जुलाई में भी छापेमारी की थी.

ईडी ने पीएमएलए के तहत जैन भाइयों को गिरफ्तार किया था. एजेंसी ने राजेश अग्रवाल नाम के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को भी गिरफ्तार किया था जिसने बिचौलिये की भूमिका निभायी और मेसर्स मिशैल पैकर्स एंड प्रिंटर्स प्राइवेट लिमिटेड में शेयर प्रीमियम के तौर पर निवेश के लिए जैन भाइयों को 90 लाख रुपये की नकदी बतौर अग्रिम राशि दी. गिरफ्तार भाइयों के जिन कंपनियों से संबंध रहे हैं उनमें मेसर्स मिशैल पैकर्स एंड प्रिंटर्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल है.

मीसा और उनके पति कथित रूप से पूर्व में इस कंपनी के निदेशक रहे हैं. एजेंसी ने कहा कि मीसा के शेयर खरीदने से पहले तक मेसर्स मिशैल पैकर्स एंड प्रिंटर्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का पता 25, तुगलक रोड, नयी दिल्ली दर्ज था. ईडी ने कहा कि 2009-10 के दौरान पता बदलकर फार्म संख्या 26 पालम फार्म्स, वीपीओ बिजवासन, नई दिल्ली हो गया. मीसा और कुमार इसी अवधि में कंपनी के निदेशक थे. मामले की जांच के तहत एजेंसी ने दंपति से पूछताछ भी की और उनके बयान दर्ज किए.

मीसा भारती पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी कंपनियों से मिले पैसे से ये फार्महाउस खरीदा है. ख़बरों के अनुसार एक करोड बीस लाख रुपये शैल कंपनियो के जरिए आए थे. ईडी ने इस मामले में मीसा भारती के सीए राजेश अग्रवाल को गिरफ्तार किया था, हालांकि सोमवार को दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें जमानत दे दी.

अग्रवाल ने राहत मांगते हुए दावा किया था कि वह न्यायिक हिरासत में हैं और उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की अब जरूरत नहीं है. सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक नीतीश राना ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि जांच अब भी जारी है और आरोपी को जमानत पर रिहा करने का यह सही समय नहीं है.