श्रीनगर। रमजान खत्म होते होते गुरुवार को जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों ने एक बड़ी वारदात को अंजाम दे डाला. आतंकियों ने श्रीनगर सिटी के प्रेस कॉलोनी में राइजिंग कश्मीर अखबार के एडिटर शुजात बुखारी की गोली मारकर हत्या कर दी. हमले में उनके एक पीएसओ की भी मौत हुई है और दूसरा गंभीर रूप से घायल हुआ और उसकी भी बाद में अस्पताल में मौत हो गई. बुखारी पर साल 2000 में भी हमला हुआ था और तभी से उन्हें पुलिस सुरक्षा मिली हुई थी.

इफ्तार पार्टी के लिए जा रहे थे 

पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि बुखारी यहां प्रेस एंक्लेव स्थित अपने कार्यालय से एक इफ्तार पार्टी के लिए जा रहे थे कि तभी अज्ञात बंदूकधारियों ने उन पर हमला कर दिया. उन्होंने बताया कि बुखारी की सुरक्षा में तैनात उनके निजी सुरक्षा अधिकारियों (पीएसओ) में से एक की इस हमले में मौत हो गई. हमले में एक पुलिसकर्मी और एक आम नागरिक घायल हो गया. दोनों की हालत गंभीर है. हमला ईद से पहले हुआ है. बुखारी ने पूर्व में द हिन्दू के कश्मीर संवाददाता के रूप में भी काम किया था. उन्होंने कश्मीर घाटी में कई शांति सम्मेलनों के आयोजनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वह पाकिस्तान के साथ ट्रैक -2 प्रक्रिया का भी हिस्सा थे. 

सीएम ने कहा-सदमे में हूं

इस घटना ने सभी को सदमें में डाल दिया है. जम्मू कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि ईद से ठीक पहले आतंकियों ने शुजात बुखारी की हत्या को अंजाम दिया. मैं इस कृत्य की घोर निंदा करती हूं. उनकी आत्मा को शांति मिले. पत्रकारों से बातचीत में महबूबा ने भरे गले के साथ कहा कि वह कुछ दिन पहले ही मुझसे मिलने आए थे. इस पर और क्या कहूं. वहीं, पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा कि शुजात बुखाीर की हत्या से मुझे सदमा लगा है.

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वह कई सम्मेलनों में शांति की हिमायत करते हुए शिरकत कर चुके हैं. उनकी मौत से पूरी पत्रकार बिरादरी को गहरा सदमा लगा है. उनके भाई बशारत बुखारी जम्मू कश्मीर सरकार में मंत्री भी हैं.

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि राइजिंग कश्मीर के एडिटर शुजात बुखारी की हत्या एक कायराना हरकत है. ये कश्मीर के शांतिप्रिय आवाजों की खामोश करने का प्रयास है. वह एक साहसी और निडर पत्रकार थे. बहुत सदमे में और दुखी हूं. मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी इस घटना की निंदा की है. उन्होंने कहा कि शुजात बुखारी की मौत से से दुखी हूं. वह एक बहादुर और निडर पत्रकार थे जिन्होंने शांति और न्याय के लिए लड़ाई की थी.

सीनियर पत्रकार इफ्तेखार गिलानी ने कहा कि इस घटना से 20 मिनट पहले ही मेरी शुजात बुखारी से बात हुई थी. ये बहुत सदमे वाली घटना है. ये जम्मू कश्मीर में पत्रकारों की हालत है. जिनके हाथ खून से रंगे हुए हैं उन्हें खुद के अंदर झांकना होगा.