नई दिल्ली: असम में भाजपा शासित सरकार ने संस्कृत स्कूल और मदरसों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने राज्य में संस्कृत स्कूल और मदरसों को पूरी तरह से बंद करने का फैसला लिया है. सरकार ने सरकारी पैसों से धार्मिक शिक्षा को बंद करने का फैसला लिया है. सरकार ने कहा कि अब जनता की मेहनत का पैसा फिजूलखर्जी में प्रयोग नहीं होगा. मदरसों और संस्कृत स्कूल बंद करने के फैसले पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि जनता का पैसा का प्रयोग धार्मिक शिक्षा देने में प्रयोग करने का कोई प्रावधान नहीं है इसलिए अब इन्हें बंद किया जाएगा. Also Read - Video: बोर न हों कोरोना के मरीज, पीपीई किट में डॉक्टर ने 'घुंघरू' गाने पर किया जबरदस्त डांस

सरकार के ये फैसला लेते ही विपक्षी दलों ने विपक्षी दलों की तरफ से विरोध की आवाज मुखर होने लगी है. विपक्ष के नेता बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि अगर अगले विधानसभा चुनाव में हमारी सरकार आएगी तो सरकार के इस फैसले को रद्द कर देंगे. Also Read - हिंसक झड़प के बाद असम और मिजोरम के मुख्यमंत्रियों ने की फोन पर बात, केंद्र ने बुलाई आपात बैठक

बता दें कि शिक्षा मेंत्री हेमंता बिस्वा शर्मा ने ऐलान किया कि असम में अगले महीने से सभी मदरसे बंद कर दिए जाएंगे. उन्होंने कहा कि जनता की मेहनत का पैसा अब किसी भी फिजूलखर्जी में नहीं जाएगा. उन्होंने कहा कि सरकारी प्रावधान में कहीं भी यह नहीं है कि जनता के पैसों से धार्मिक शिक्षा दी जाए. इसलिए सरकार ने सभी ऐसे मदरसों और संस्कृत स्कूल बंद करने का फैसला लिया है जो सरकारी मदद से चल रहे हैं.

उन्होंने कहा कि अब राज्य में किसी भी धार्मिक शिक्षा को सरकारी फंड से नहीं चलाया जाएगा. साथ ही शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्राइवेट मदरसों या किसी अन्य धार्मिक शिक्षा संस्थान के बारे में हम कुछ नहीं कह सकते. आपको बता दें कि असम में सरकारी मदद से करीब 614 मदरसे और 100 संस्कृत स्कूल चलाए जा रहे हैं.