8 नवंबर को शाम 8 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देश के नाम संबोधन। किसी को अंदाज़ा नहीं था कि प्रधानमंत्री कोई ऐसा ऐलान करने वाले हैं जो आने वाले दिनों में देश में उथल-पुथल मचा देगा। कालेधन पर बड़ी मार करते हुए उन्होंने 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने का ऐलान किया। कुछ देर तो लोगों को कुछ समझ ही नहीं आया। जब सारी बातें समझ आयीं तो लोगों ने प्रधानमंत्री के इस साहसिक कदम की सराहना की। लेकिन कुछ दिन लाइन में लगने के बाद लोगों को लगा कि फैसला तो अच्छा था लेकिन इससे जनता परेशान हो रही है। सरकार के विमुद्रीकरण के फैसले के बाद आम जनता में कुछ अव्यवस्था जरूर हुई है लेकिन कई मसले खुद-ब-खूद हल हो गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस फैसले का सकारात्मक असर भी दिखना शुरू हो गया है…

कश्मीर में पत्थरबाज़ी के दौर का अंत
हिज़बुल कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद से ही कश्मीर में अशांति व्याप्त थी। पिछले चार महीने से कर्फ्यू कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित था। नोटबंदी का फैसला झुलसते कश्मीर पर मरहम का काम कर रहा है। रिपोर्ट्स हैं कि घाटी में जिंदगी पटरी पर लौट आई है। लोग अपने नोट बदलवाने के लिए बैंक जा रहे हैं। नोटबंदी के फैसले के बाद पहले दो दिनों में कश्मीर के बाशिंदों ने डेढ़ लाख करोड़ रुपए की करेंसी जमा करवाई और अब यह राशि साढ़े तीन लाख करोड़ से भी ज्यादा हो गई है।

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कश्मीर में पत्थरबाज़ी बेहद आम है। युवा 500 और 1000 की नोट लेकर सुरक्षाकर्मियों पर पत्थर बरसाते हैं। लेकिन इस वक्त पैसा देने वालों के ही पसीने छूटे हुए हैं तो वो पत्थरबाज़ी के लिए पैसा कैसे देंगे? लोग आंदोलन भूलकर अपने पैसे एक्सचेंज करवा रहे हैं। घाटी में स्कूल फूँकने की भी कवायद तेज़ थी। नोटबंदी के फैसले के बाद उस पर भी लगाम लगा है।

नगर निगमों की कमाई हफ्ते भर में कई गुना बढ़ी
नोटबंदी के फैसले के बाद लोग पुराने नोट खपाने के लिए अपने बकाया बिल और टैक्स जमा करने में जुट गए हैं। इसका फायदा यह हुआ कि देश के प्रमुख नगर निकायों की कमाई हफ्तेभर में 46 गुना तक इजाफा हुआ है। मुंबई, पटना, रायपुर, अहमदाबाद, रांची और गुवाहाटी जैसे शहरों के नगर निकाय के राजस्व में भारी उछाल देखा गया है। लोग कई महीनो के बकाया चुकाने में जुट गए हैं। दिल्ली में ऐसे लोगों की संख्या भी काफी ज्यादा है जिन्होंने लंबे समय से संपत्ति कर नहीं जमा कराया है।

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अपराधों में गिरावट
पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट बंद होने का असर क्राइम पर भी दिख रहा है। लूट, छिनैती और चोरी की इक्का-दुक्का घटनाएं छोड़ दें तो इनकी संख्या में कमी हुई है। इस बीच आला अफसरों के यहां शिकायतें लेकर पहुंचने वाले फरियादियों की संख्या भी आधी हो गई है। आठ नवम्बर की आधी रात से पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट बंद हो गए। नोट बंदी की घोषणा के बाद से अपराधों में भारी कमी आई है। लूट-छिनैती की घटनाएं छोड़ दें तो मारपीट व अन्य विवाद में काफी कमी आई है। आईजी, डीआईजी के यहां फरियादियों की संख्या भी घट गई है।

फिर विपक्ष क्यों कर रहा है विरोध?
सरकार के कालेधन के खिलाफ इस बड़े कदम को देश-विदेश में काफी सराहा जा रहा है। ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने इस बेहद साहसिक और हैरतअंगेज़ कदम ठहराया है। बिल गेट्स समेत कई हस्तियों ने सरकार के इस फैसले को बेहद साहस भरा बताया है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रवक्ता गैरी राइस ने भी कहा कि मेरा मानना है कि जब कोई देश इस तरह के कदम उठाता है तो उसे लागू करने में कई तरह की परेशानियाँ उभरकर सामने आती हैं। फिर विपक्ष इस कदम का संसद से सड़क तक इतना व्यापक विरोध क्यों कर रहा है…?