नई दिल्ली. तेलंगाना में चुनाव कराने के मुद्दे पर निर्वाचन आयोग के शुक्रवार को चर्चा करने की संभावना है. दरअसल, राज्य के मंत्रिमंडल ने विधानसभा भंग करने की सिफारिश की है. आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि निर्वाचन आयोग हर मंगलवार और शुक्रवार को कई मुद्दों पर चर्चा करने के लिये बैठक करता है और अगली बैठक में इस दक्षिणी राज्य में चुनाव आयोजित करने का मुद्दा उठ सकता है.

अधिकारी ने बताया, अंतिम निर्णय से पहले त्योहार, परीक्षाएं और मौसम की स्थिति जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी. गौरतलब है कि तेलंगाना विधानसभा का कार्यकाल जून 2019 तक था.

गुरुवार को की थी सिफारिश
बता दें कि तेलंगाना की टीआरएस सरकार ने एक बड़ा राजनीतिक दांव चलते हुए गुरूवार को राज्य विधानसभा को उसके निर्धारित समय से कुछ महीने पहले ही भंग करने की सिफारिश कर दी. टीआरएस को उम्मीद है कि पार्टी प्रमुख के चंद्रशेखर राव के करिश्मे और बिखरे विपक्ष की वजह से वह लगातार दूसरी बार सत्ता में आ जाएगी. माना जा रहा है कि पार्टी लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव एक साथ होने की स्थिति में ‘‘केसीआर बनाम मोदी’’ मुकाबले को भी टालना चाहती थी.

राहुल गांधी पर साधा निशाना
इस बीच राव ने विधानसभा की 119 सीटों में से 105 सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी. पार्टी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए उसे तेलंगाना की सबसे बड़ी दुश्मन बताया. राव ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को देश का ‘‘सबसे बड़ा मसखरा’’ बताया. हालांकि उन्होंने भाजपा की आलोचना से परहेज किया.

हफ्तों से चल रही थी अटकलें
हफ्तों से चल रही अटकलों को विराम देते हुए, मुख्यमंत्री राव ने राज्य कैबिनेट की बैठक की अध्यक्षता की जिसमें विधानसभा भंग किए जाने का प्रस्ताव पारित किया गया. राज्यपाल ई एस एल नरसिम्हन ने सिफारिश को स्वीकार कर लिया और 2014 में बनी राज्य की पहली सरकार के मुखिया राव को कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर पद पर बने रहने को कहा गया.