नई दिल्ली: पांच राज्यों के चुनाव परिणाम घोषित होने में लगे अधिक समय के लिए चुनाव आयोग की सतर्कता, उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर के कारण जीत हार का काफी कम अंतर, ईवीएम से जुड़ी वीवीपीएटी मशीन की पर्चियों की गणना और उम्मीदवारों की छोटी-मोटी आपत्तियों को मुख्य वजह बताया गया है.Also Read - Gujarat Panchayat Chunav: पंचायत चुनाव का कार्यक्रम जारी, जानें कब डाले जाएंगे वोट और कब आएगा परिणाम

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चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि विधानसभा चुनाव वाले राज्यों छत्तीसगढ़, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान और मिजोरम के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को प्रत्येक दौर की मतगणना के बाद प्रत्येक उम्मीदवार को मिले मतों की संख्या का प्रमाणपत्र देने संबंधी नियम का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया था. इसका पालन मतगणना पूरी होने में देरी की वजह बना. अप्रैल, 2014 के अपने एक निर्देश का हवाला देते हुए चुनाव आयोग ने कहा था कि पर्यवेक्षक और निर्वाचन अधिकारी मतगणना के हर चरण के बाद सभी कुछ जांचने के बाद हर उम्मीदवार के नतीजे पर हस्ताक्षर करेंगे. Also Read - By-elections 2021: राज्यसभा और विधान परिषद के लिए उपचुनावों की घोषणा, चुनाव आयोग ने जारी की तारीख

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बुधवार सुबह तक घोषित हो पाए सारे नतीजे

इसके अलावा ईवीएम पर तमाम दलों द्वारा उठाये गये सवालों के कारण आयोग द्वारा मतगणना में बरती गयी अतिरिक्त सतर्कता को भी देरी का एक कारण होने से आयोग के अधिकारियों ने इंकार नहीं किया. उल्लेखनीय है कि मंगलवार को शुरु हुयी मतगणना के अंतिम परिणाम बुधवार सुबह तक घोषित हो सके. आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि परिणाम घोषित होने में देरी वाली अधिकांश सीटें ऐसी थीं जिन पर उम्मीवारों के बीच हार जीत का अंतर बेहद कम था. इसलिये उम्मीदवारों द्वारा पुन: मतगणना कराने की मांग से बचने के लिये मतों की गणना में अत्यधिक सतर्कता बरती गयी. इससे परिणाम घोषित होने में बेशक देरी हुयी लेकिन पुन: मतगणना की मांग का आंकड़ा बहुत कम रहा.

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वीवीपीएटी की पर्चियों से मिलान भी बना देरी का कारण

अधिकारी ने देरी का तीसरा मुख्य कारण ईवीएम के परिणाम का वीवीपीएटी की पर्चियों से मिलान करने को भी बताया. उन्होंने बताया कि हालांकि वीवीपीएटी का इस्तेमाल सभी मतदान केन्द्रों पर होना था लेकिन प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में किसी एक मतदान केन्द्र की वीवीपीएटी मशीन की पर्चियों का मिलान ईवीएम के परिणाम से करने की बाध्यता के कारण अंतिम परिणाम घोषित करने में देरी हुयी. उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में औसतन 45 मिनट से एक घंटे तक का अतिरिक्त समय लगा. अधिकारी ने बताया कि इसका असर समूचे चुनाव परिणाम घोषित करने में देरी के रूप में दिखा.