नई दिल्ली: देश में ईवीएम को लेकर कई तरह की बातें हो रही हैं. कई दलों ने चुनाव आयोग से बैलेट पेपर वापस लाने की मांग की है. इस बीच ईवीएम को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओपी रावत ने बड़ा बयान दिया है. रावत ने कहा कि ईवीएम को बलि का बकरा बनाया जा रहा है, क्योंकि मशीनें बोल नहीं सकतीं. राजनीतिक दलों को अपनी हार के लिए किसी न किसी को जिम्मदार ठहराने की जरूरत होती है. उन्होंने बैलेट पेपर वापस लाने की सभी संभावनाओं को खारिज कर दिया.

वीवीपैट से बढ़ेगी विश्वसनीयता
मर्चेट्स चेंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा आयोजित ‘निर्वाचन ईमानदारी और चुनावों में धन की भूमिका’ पर आयोजित एक इंटरएक्टिव सत्र में यहां रावत ने कहा, जब भी इस मुद्दे पर सवाल उठते हैं, हम स्पष्टीकरण देते हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने पिछली जुलाई को सर्वदलीय बैठक में घोषित किया था कि आगे से सभी चुनाव वोटर वेरिफियेबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) मशीनों के साथ ईवीएम का प्रयोग करके किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए ईवीएम के साथ वीवीपैट का प्रयोग भी किया जाएगा.

राजनीतिक दलों को चाहिए बहाना
रावत ने कहा कि राजनीतिक दलों द्वारा ईवीएम को आसानी से बलि का बकरा बना दिया जाता है, क्योंकि वह बोल नहीं सकतीं. उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को अपनी हार का ठीकरा फोड़ने के लिए किसी न किसी चीज की जरूरत होती है. उन्होंने दावा किया कि भारत में मुक्त और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया ने विश्व को प्रभावित किया है. रावत ने कहा कि वीवीपेट युक्त ईवीएम से ही चुनाव होंगे, मतपत्र की ओर फिर वापस लौटने का सवाल ही नहीं उठता है.

कुछ ही घंटों में रिजल्ट देने में सक्षम
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि यह प्रशंसा योग्य बात है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के बावजूद, चुनाव आयोग कुछ ही घंटों में परिणाम देने में सक्षम है. उन्होंने 2014 में हार्वड और सिडनी यूनिवर्सिटी के एक सर्वे का उदाहरण देते हुए कहा कि विश्व में जितने भी चुनाव होते हैं, सर्वे में पाया गया कि 11 में से 9 मानकों पर भारत खरा उतरा. उन्होंने कहा कि इस सर्वे में 100 में से भारत को 59 नंबर मिले.