नई दिल्ली: नीति आयोग ने अपने रणनीतिक दस्तावेज में बिजली क्षेत्र के लिए कई सुधारों की बात कही है. इसमें स्मार्ट ग्रिड को बढ़ावा देने, बिजली की नीलामी, बिजली वितरण कंपनियों का निजीकरण, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के जरिए सब्सिडी का भुगतान और बिजली आपूर्ति के लिए 100 प्रतिशत मीटर लगाना आदि शामिल है. आयोग ने ‘नए भारत के लिये रणनीति @75’ जारी किया है जिसमें 2022-23 के लिये स्पष्ट लक्ष्य के साथ 41 प्रमुख क्षेत्रों के बारे में विस्तार से विवरण देने के साथ लक्ष्यों को हासिल करने के लिये उपाय सुझाए गए हैं.

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दस्तावेज में स्मार्ट ग्रिड और स्मार्ट मीटर को बढ़ावा देने के साथ राज्य बिजली उत्पादन कंपनियों समेत सभी के मामले में बिजली खरीद समझौता प्रतिस्पर्धी बोली के जरिए ही किए जाने का सुझाव दिया गया है.रणनीति दस्तावेज के अनुसार राज्य बिजली वितरण कंपनियों के निजीकरण और / या फ्रेंचाइजी मॉडल के उपयोग से सकल तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान कम होगा. बिजली वितरण कंपनियां ग्रामीण क्षेत्रों में अपने खुदरा कारोबार के लिए फ्रेंचाइजी मॉडल अपना सकती हैं और प्रदर्शन मानदंड का न्यूनतम स्तर निर्धारित कर सकती हैं. इसमें स्थानीय रूप से भरोसेमंद आपूर्ति के लिए विकेंद्रित उत्पादन साधनों तथा भंडारण प्रणाली शामिल हैं.

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बिजली नियामकों की स्वायत्तता पर नियामकीय निकायों को और मजबूत किए जाने और उन्हें वास्तव में स्वतंत्र बनाए जाने की जरूरत है.आयोग ने कहा कि कृषि क्षेत्र के लिये उर्वरक, बिजली और फसल बीमा आदि के लिये अलग-अलग सब्सिडी देने के बजाए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिये प्रति एकड़ जमीन के लिये शुरू में ही सब्सिडी देने पर विचार किया जा सकता है.

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दस्तावेज में कृषि के लिये सौर पंपों के उपयोग को बढ़ावा देने का सुझाव दिया गया है और कहा गया है कि स्थानीय बिजली वितरण कंपनियों को किसानों से अतिरिक्त बिजली खरीदनी चाहिए. बिना सूचना के बिजली कटौती के बारे में नीति आयोग के रणनीतिक दस्तावेज में सुझाव दिया गया है कि बिजली वितरण कंपनियां अगर बिजली कटौती करती हैं तो उन पर जुर्माना लगाया जा सकता है. दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि बिजली की मांग प्रबंधित करने के लिए 100 प्रतिशत मीटर लगाने, स्मार्ट मीटर और मीटर के जरिये कृषि को बिजली दिया जाना जरूरी है.

(इनपुट-भाषा)