नई दिल्ली: सीमा विवाद के समाधान के लिए भारत और चीन के बीच मध्यस्थता करने संबंधी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पेशकश पर भारत ने बुधवार को कहा कि इसका शांतिपूर्ण ढंग से समाधान करने के लिए चीनी पक्ष के साथ बातचीत चल रही है. Also Read - चीन हो या कोई और संघर्ष में भारत के साथ खड़ी रहेगी अमेरिकी आर्मी: व्हाइट हाउस

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने ऑनलाइन मीडिया ब्रीफिंग में सवालों के जवाब में कहा, ”हम इसका शांतिपूर्ण ढंग से समाधान करने के लिए चीनी पक्ष के साथ बातचीत कर रहे हैं.” Also Read - देश में साइबर क्राइम में 200% इजाफा, PMO ने कहा- चीन को जिम्मेदार ठहराने के सबूत नहीं

भारत और चीन के बीच तनावपूर्ण सीमा गतिरोध के बीच ट्रंप ने बीते बुधवार को कहा था कि वह दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए ”तैयार, इच्छुक और मध्यस्थता करने में सक्षम हैं.” ट्रंप ने एक ट्वीट में कहा था, ”हमने भारत और चीन दोनों को सूचित किया है कि अमेरिका उनके इस समय जोर पकड़ रहे सीमा विवाद में मध्यस्थता करने के लिए तैयार, इच्छुक और सक्षम है.” Also Read - विदेश सचिव बोले- भारत कूटनीतिक और सैन्य स्तर के माध्यमों से कर रहा है चीन के साथ बातचीत

ट्रंप ने पहले कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच भी मध्यस्थता की पेशकश की थी, लेकिन भारत ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था. भारत का कहना है कि द्विपक्षीय संबंधों में तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है.

ट्रंप का यह अनपेक्षित प्रस्ताव ऐसे दिन आया था, जब चीन ने एक तरह से सुलह वाले अंदाज में कहा कि भारत के साथ सीमा पर हालात कुल मिलाकर स्थिर और काबू पाने लायक हैं. बीजिंग में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा कि चीन और भारत के पास संवाद और परामर्श के माध्यम से मुद्दों को सुलझाने के लिए उचित प्रणालियां और संचार माध्यम हैं.

नई दिल्ली में चीनी राजदूत सुन वीदोंग ने कहा कि चीन और भारत को कभी अपने मतभेदों की छाया समग्र द्विपक्षीय संबंधों पर नहीं पड़ने देनी चाहिए और आपसी विश्वास को बढ़ाना चाहिए. सुन ने सैन्य गतिरोध का जिक्र किये बिना कहा कि दोनों पक्षों को संचार के जरिये अपने मतभेदों को सुलझाना चाहिए और इस बुनियादी बात को मानना चाहिए कि वे एक- दूसरे के लिए खतरा नहीं हैं.

उन्होंने कहा, ”हमें अपने मतभेदों को सही से देखना चाहिए और उनकी छाया द्विपक्षीय सहयोग के समग्र हालात पर नहीं पड़ने देनी चाहिए. उसी समय हमें क्रमिक तरीके से संचार के जरिये समझ बढ़ानी चाहिए और मतभेदों को सतत तरीके से सुलझाना चाहिए.”

ट्रंप का इस समय व्यापार, नोवेल कोरोना वायरस महामारी की उत्पत्ति, हांगकांग पर चीन की नई सुरक्षा कार्रवाई और विवादास्पद दक्षिण चीन सागर में उसकी सेना के बढ़ने जैसे मुददों पर चीन से टकराव चल रहा है. इस बीच रोचक बात है कि एक वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक ने चीन के साथ मौजूदा सीमा विवाद पर भारत का समर्थन किया है. उन्होंने बीजिंग पर यथास्थिति को बदलने की कोशिश में भारत के साथ सीमा पर संघर्ष में शामिल होने का आरोप भी लगाया.

दक्षिण एशिया के लिए शीर्ष अमेरिकी राजनयिक एलिस जी वेल्स ने भारत को चीन के आक्रामक रुख का विरोध करने के लिए भी प्रोत्साहित किया था. उन्होंने सेवानिवृत्त होने से कुछ दिन पहले 20 मई को यहां अटलांटिक काउंसिल में कहा था, ”अगर आप दक्षिण चीन सागर की तरफ देखें तो यहां चीन के परिचालन का एक तरीका है और यह सतत उग्रता है तथा यथास्थिति को बदलने, नियमों को बदलने की लगातार कोशिश है.”

चीन ने अगले दिन वेल्स के बयान को बेतुका कहकर खारिज कर दिया था. चीन के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने यह भी कहा कि बीजिंग और नयी दिल्ली में राजनयिक माध्यमों से बातचीत हो रही है और वाशिंगटन को इसमें कोई लेना-देना नहीं है.

करीब 3,500 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) भारत और चीन के बीच वस्तुत: सीमा है.

एलएसी पर लद्दाख और उत्तरी सिक्किम में अनेक क्षेत्रों में भारत और चीन दोनों की सेनाओं ने हाल ही में सैन्य निर्माण किये हैं. इससे दो अलग-अलग गतिरोध की घटनाओं के दो सप्ताह बाद भी दोनों के बीच तनाव बढ़ने तथा दोनों के रुख में सख्ती का स्पष्ट संकेत मिलता है.

भारत ने कहा है कि चीनी सेना लद्दाख और सिक्किम में एलएसी पर उसके सैनिकों की सामान्य गश्त में अवरोध पैदा कर रही है. भारत ने चीन की इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया कि भारतीय बलों द्वारा चीनी पक्ष की तरफ अतिक्रमण से दोनों सेनाओं के बीच तनाव बढ़ गया.

विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत की सभी गतिविधियां सीमा के इसी ओर संचालित की गई हैं और भारत ने सीमा प्रबंधन के संबंध में हमेशा बहुत जिम्मेदाराना रुख अपनाया है. उसी समय विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने पिछले सप्ताह एक ऑनलाइन ब्रीफिंग में कहा था, ”भारतीय सैनिकों द्वारा पश्चिमी सेक्टर या सिक्किम सेक्टर में एलएसी के आसपास गतिविधियां संचालित करने की बात सही नहीं है. भारतीय सैनिक भारत-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में वास्तविक नियंत्रण रेखा से पूरी तरह अवगत हैं और निष्ठापूर्वक इसका पालन करते हैं.”