भोपाल: मध्य प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में हुई प्रशासनिक एवं आर्थिक गड़बड़ियों के मामले में इस विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति बृज किशोर कुठियाला सहित 20 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. ईओडब्ल्यू के अतिरिक्त महानिदेशक के.एन. तिवारी ने रविवार को बताया कि माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में हुई प्रशासनिक और आर्थिक गड़बड़ियों के मामले में कुठियाला सहित 20 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. कुठियाला मुख्य आरोपी हैं. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में पिछले सालों के दौरान हुईं नियुक्तियों और अन्य प्रशासनिक फैसलों से जुड़े मामले में की गई शिकायत पर आर्थिक अन्वेषण शाखा(ईओडब्ल्यू) ने पूर्व कुलपति ब्रजकिशोर कुठियाला सहित 20 लोगों के खिलाफ रविवार को मामला दर्ज कर लिया है.

तिवारी ने बताया कि इसमें मुख्य आरोपी तत्कालीन कुलपति कुठियाला हैं और उनके साथ करीब 19 आरोपी और भी हैं. ये सभी उसी विश्वविद्यालय के ही लोग हैं, जो गलत तरीके से नियुक्त किए गए या जिन्होंने कुठियाला के संरक्षण में गलत तरीके से आर्थिक एवं प्रशासनिक अनियमितताएं की. उन्होंने कहा कि उदाहरण के लिए उन्होंने अपने इलाज के दौरान कुछ मेडिकल बिल रीइम्बर्स कराए थे, जिनको वह नहीं ले सकते थे. तिवारी ने बताया कि इस मामले में उनकी गिरफ्तारियां हो सकती हैं. उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जाएगा. उनसे आगे पूछताछ की जाएगी.

हालांकि, उन्होंने कहा, अभी इस एफआईआर में कोई राजनेता नहीं है. उन्होंने कहा कि इन लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 409 एवं 120 (बी) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज की गई है. तिवारी ने बताया कि माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में पिछले करीब 15 सालों के दौरान प्रशासनिक एवं आर्थिक अनियमितताएं हुईं, जिनकी जांच चल रही है.

ईओडब्ल्यू के अतिरिक्त महानिदेशक तिवारी ने कि पिछली जनवरी में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी गोपाल रेड्डी, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के पूर्व विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (ओएसडी) भूपेन्द्र गुप्ता और संदीप दीक्षित की तीन सदस्यीय समिति गठित की थी. पिछले मार्च में इन्होंने रिपोर्ट दी थी. इस रिपोर्ट के आधार पर विश्व विद्यालय के रजिस्ट्रार दीपेंद्र सिंह बघेल से आवेदन प्राप्त हुआ था, जिसमें विशेष तौर पर पिछले कुलपति कुठियाला के 2010 से लेकर 2018 के आठ साल के कार्यकाल में उनके द्वारा प्रशासनिक एवं आर्थिक अनियमितताओं की विस्तार से बताया गया था. उसके आधार पर हमने रिपोर्ट दर्ज की है.

दरअसल, “विश्वविद्यालय की ओर से की गई शिकायतों में कहा गया था कि वर्ष 2010 से 2018 की अवधि में कठियाला ने कुलपति पद पर रहते हुए कई नियुक्तियां नियम विरुद्घ कीं. ये नियुक्तियां यूजीसी के मानकों का अवहेलना कर की गईं. इसके साथ ही कुठियाला ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध तरीके से विश्वविद्यालय की राशि का अपने और परिवार पर व्यय किया.

ईओडब्ल्यू में की गई शिकायत में कहा गया था कि वर्ष 2003 से वर्ष 2018 के बीच जिन शिक्षकों की नियुक्तियां की गईं, वे यूजीसी के नियमों के विपरीत थीं और उनके जरिए अनुचित लाभ पहुंचाया गया. कुठियाला पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को, श्री श्री रविशंकर के आश्रम को, भारतीय शिक्षण मंडल आदि को कार्यक्रमों के लिए आर्थिक निधि जारी करने के आरोप हैं.