
Anjali Karmakar
अंजलि कर्मकार 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव हैं. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है. यहीं से मास कॉम में मास्टर्स की डिग्री ली ... और पढ़ें
जिंदगी चलाने के लिए पैसा हर किसी की जरूरत है. पैसा कमाने के लिए कोई मजदूरी करता है, कोई दुकान चलाता है, कोई नौकरी करता है. कोई बिजनेस में हाथ आजमाता है. दुकानदार और व्यापारी को मुनाफा होता है. मजदूर को दैनिक आधार पर दिहाड़ी मिलती है. वहीं, नौकरी कर रहे शख्स को महीने के आखिर में पगार मिलती है. इसे वेतन,तनख्वाह और सैलरी या इनकम कहते हैं.
हर व्यक्ति अपनी मेहनत के लिए उचित सम्मान और मेहनताना चाहता है. फिर भी कई कंपनियों में एक समान पोस्ट और काम के लिए सैलरी देने पर भेदभाव होता है. समान जॉब प्रोफाइल के लिए किसी फीमेल एम्प्लॉयी को मेल एम्प्लॉयी की तुलना में आमतौर पर कम सैलरी मिलती है. जबकि समान काम के लिए समान वेतन पाना हमारा संवैधानिक अधिकार है.
समान वेतन की गारंटी देता है?
भारतीय संविधान का आर्टिकल 39 (D) कहता है कि पुरुषों और महिलाओं दोनों को समान काम के लिए समान वेतन मिलना चाहिए. इसलिए देश में समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 (Equal Remuneration Act, 1976) लागू किया गया है. इस कानून के तहत अगर किसी मेल और फीमेल एम्प्लॉयी का जॉब प्रोफाइल एक ही है, तो दोनों को बराबर की सैलरी पाने का अधिकार है. लिंग, धर्म, जाति या समुदाय के आधार पर सैलरी में भेदभाव नहीं किया जा सकता. वहीं, श्रम संहिता 2019 मिनिमम मजदूरी और समय पर पेमेंट की गारंटी देता है.
सरकारी और प्राइवेट दोनों में लागू होता है पारिश्रमिक अधिनियम
समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 सरकारी और प्राइवेट दोनों कंपनियों पर लागू होता है. ऐसे में अगर कोई कंपनी वेतन में भेदभाव करती है, तो यह कानून के खिलाफ होता है. ऐसे में शिकायत की जांच होती है और आरोप सही साबित होने पर संबंधित कंपनी और मैनेजमेंट पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.कई कंपनियां व्हिसलब्लोअर पॉलिसी लागू करती हैं, जिसमें कर्मचारी अपनी शिकायत गुप्त रूप से दर्ज कर सकते हैं.
अब जान लें अपने अधिकार
कहां करेंगे सैलरी भेदभाव की शिकायत?
क्या कंपनी नौकरी से निकाल सकती है?
अगर आप सैलरी को लेकर हो रहे भेदभाव की शिकायत करते हैं, उसकी जांच चल रही है; तो कंपनी आपको नौकरी से नहीं निकाल सकती है. किसी कर्मचारी को केवल इसलिए निकाल देना या प्रताड़ित करना कि उसने शिकायत की है, इसे टेक्निकल टर्म में‘रिटेलिएशन’ कहा जाता है. ऐसा करना कानूनन गलत है. अगर कोई कंपनी ऐसा करती है तो आप उसके खिलाफ लेबर कोर्ट में केस दर्ज करने का ऑप्शन है.
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