ऑफिस में एक समान प्रोफाइल के लिए सैलरी में नहीं किया जा सकता फर्क, हर एम्प्लॉयी को जानना चाहिए ये अधिकार

Equal Pay for Equal Work: भारतीय संविधान और कानून के मुताबिक लिंग, जाति, धर्म या क्षेत्र के आधार पर किसी कर्मचारी के वेतन में भेदभाव नहीं किया जा सकता है. अगर कोई कर्मचारी समान जिम्मेदारी और मेहनत के बावजूद कम वेतन पा रहा है, तो वह अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकता है.

Published date india.com Published: February 15, 2026 12:35 PM IST
ऑफिस में एक समान प्रोफाइल के लिए सैलरी में नहीं किया जा सकता फर्क, हर एम्प्लॉयी को जानना चाहिए ये अधिकार
प्रतीकात्मक तस्वीर.

जिंदगी चलाने के लिए पैसा हर किसी की जरूरत है. पैसा कमाने के लिए कोई मजदूरी करता है, कोई दुकान चलाता है, कोई नौकरी करता है. कोई बिजनेस में हाथ आजमाता है. दुकानदार और व्यापारी को मुनाफा होता है. मजदूर को दैनिक आधार पर दिहाड़ी मिलती है. वहीं, नौकरी कर रहे शख्स को महीने के आखिर में पगार मिलती है. इसे वेतन,तनख्वाह और सैलरी या इनकम कहते हैं.

हर व्यक्ति अपनी मेहनत के लिए उचित सम्मान और मेहनताना चाहता है. फिर भी कई कंपनियों में एक समान पोस्ट और काम के लिए सैलरी देने पर भेदभाव होता है. समान जॉब प्रोफाइल के लिए किसी फीमेल एम्प्लॉयी को मेल एम्प्लॉयी की तुलना में आमतौर पर कम सैलरी मिलती है. जबकि समान काम के लिए समान वेतन पाना हमारा संवैधानिक अधिकार है.

समान वेतन की गारंटी देता है?
भारतीय संविधान का आर्टिकल 39 (D) कहता है कि पुरुषों और महिलाओं दोनों को समान काम के लिए समान वेतन मिलना चाहिए. इसलिए देश में समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 (Equal Remuneration Act, 1976) लागू किया गया है. इस कानून के तहत अगर किसी मेल और फीमेल एम्प्लॉयी का जॉब प्रोफाइल एक ही है, तो दोनों को बराबर की सैलरी पाने का अधिकार है. लिंग, धर्म, जाति या समुदाय के आधार पर सैलरी में भेदभाव नहीं किया जा सकता. वहीं, श्रम संहिता 2019 मिनिमम मजदूरी और समय पर पेमेंट की गारंटी देता है.

सरकारी और प्राइवेट दोनों में लागू होता है पारिश्रमिक अधिनियम
समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 सरकारी और प्राइवेट दोनों कंपनियों पर लागू होता है. ऐसे में अगर कोई कंपनी वेतन में भेदभाव करती है, तो यह कानून के खिलाफ होता है. ऐसे में शिकायत की जांच होती है और आरोप सही साबित होने पर संबंधित कंपनी और मैनेजमेंट पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.कई कंपनियां व्हिसलब्लोअर पॉलिसी लागू करती हैं, जिसमें कर्मचारी अपनी शिकायत गुप्त रूप से दर्ज कर सकते हैं.

अब जान लें अपने अधिकार

  • समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 के मुताबिक, अगर आपके साथ सैलरी को लेकर भेदभाव होता है, तो आपको इसकी शिकायत करने का अधिकार है.
  • आपको अपनी प्राइवेसी की रक्षा करने का अधिकार है.
  • अगर शिकायत के बाद कंपनी आपको किसी भी तरह से परेशान करती है, तो आपको कानूनी मदद लेने का अधिकार है.
  • आपको लेबर कोर्ट में अपील का अधिकार है.
  • आपको महिला आयोग या मानवाधिकार आयोग में भी अपील करने का पूरा अधिकार है.

कहां करेंगे सैलरी भेदभाव की शिकायत?

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  • अगर समान जॉब प्रोफाइल के लिए भी आपके साथ सैलरी को भेदभाव हो रहा है, तो बिना किसी डर या झिझक के अपने हक के लिए लड़िए.
  • समान काम के लिए समान वेतन आपका संवैधानिक और कानूनी अधिकार है. ऐसे मामलों में आप HR डिपार्टमेंट या कमिटी में शिकायत दर्ज कर सकते हैं.
  • इसके लिए आपको प्रूफ देना होगा. आप अपनी सैलरी स्लिप, जॉब प्रोफाइल, अपना KRA, अपॉइंटमेंट लेटर, पुरानी कंपनियों में काम करने का एक्सपीरिएंस लेटर, दूसरे एम्प्लॉयी का KRA और सैलरी का रिकॉर्ड दिखा सकते हैं.
  • अगर इंटर्नल कमिटी आपकी शिकायत पर कोई कदम नहीं उठाती है, तो आपके पास राज्य के श्रम विभाग में शिकायत दर्ज कराने का रास्ता खुला है.
  • गंभीर मामलों में आप लेबर कोर्ट में अप्लाई कर सकते हैं.

क्या कंपनी नौकरी से निकाल सकती है?
अगर आप सैलरी को लेकर हो रहे भेदभाव की शिकायत करते हैं, उसकी जांच चल रही है; तो कंपनी आपको नौकरी से नहीं निकाल सकती है. किसी कर्मचारी को केवल इसलिए निकाल देना या प्रताड़ित करना कि उसने शिकायत की है, इसे टेक्निकल टर्म में‘रिटेलिएशन’ कहा जाता है. ऐसा करना कानूनन गलत है. अगर कोई कंपनी ऐसा करती है तो आप उसके खिलाफ लेबर कोर्ट में केस दर्ज करने का ऑप्शन है.

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