नई दिल्ली. स्वीडन की दूरसंचार उपकरण कंपनी Ericsson ने सुप्रीम कोर्ट में अनिल अंबानी और उनके ग्रुप के दो सीनियर एग्जीक्यूटिव को लेकर एक याचिका दाखिल की है. इसमें कहा गया है कि कोर्ट अनिल अंबानी और दोनों अफसरों को देश छोड़कर जाने से रोकने के इंतजाम करें. बता दें कि कंपनी पहले आरोप लगा चुकी है कि अनिल अंबानी सहित इन दोनों अफसरों ने जानबूझकर 550 करोड़ रुपये की पेमेंट नहीं दी है.

Ericsson अपने कर्ज को लेकर कोर्ट पहुंचा था. जहां से ये कहा गया था कि 30 सितंबर तक अंबानी ग्रुप बकाया चुकता करे. अभी तक बकाया नहीं दिए जाने की स्थिति में कंपनी ने फिर से निर्णय लिया है कि वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर मामले का हल निकाले. बता दें कि अनिल अंबानी की कंपनी आरकॉम पहले से कर्ज में है और उसपर 45000 करोड़ रुपये का कर्ज है.

Ericsson ने कहा है कि अनिल अंबानी की कंपनी कानून का सम्मान नहीं करती है. इकॉनमिक टाइम्स के मुताबिक, रिलायंस कम्यूनिकेशन ने मीयाद 60 दिन बढ़ाने की अपील की थी. लेकिन Ericsson ने इससे इनकार कर दिया. रिलायंस कम्यूनिकेशन ने कहा कि डॉट के कारण वह रिलायंस जियो को स्पेक्ट्रम नहीं बेच पा रही और Ericsson का 550 करोड़ का भुगतान भी नहीं कर पा रही है. दूसरी तरफ स्टॉक एक्सचेंज को भेजे नोटिस में कंपनी ने कहा कि, Ericsson इंडिया लिमिटेड उसका एक गैर सुरक्षित लेनदार है और उसने 1 अक्टूबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट में 550 करोड़ के भुगतान निपटारे के लिए याचिका दायर की है. एरिक्सन की यह याचिका गैरजरूरी है.

क्या है पूरा मामला
बता दें कि साल 2014 में Ericsson और रिलायंस कम्यूनिकेशन के बीच समझौता हुआ था. इसके मुताबिक, Ericsoon को 7 साल तक रिलायंस कम्यूनिकेशन के पूरे देश में फैले टेलीकॉम नेटवर्क को मैनेज और ऑपरेट करना था. Ericsson का दावा है कि करीब 1000 करोड़ की इस डील का रिलायंस द्वारा अभी तक भुगतान नहीं किया गया है. कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उसने सितंबर अंत तक बकाए की आधा रकम यानि कि 550 करोड़ रुपए का भुगतान करने का वादा किया था.