नई दिल्‍ली: भारत आए यूरोपीय यूनियन (EU) के सांसदों का 27 सदस्‍सीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार सुबह दिल्‍ली से कश्‍मीर की यात्रा के लिए रवाना हो गया. प्रतिनिधि के ये सांसद सुबह एक बस से दिल्‍ली एयरपोर्ट पहुंचे, जहां से विमान के जरिए श्रीनगर के लिए रवाना हो गए. बता दें अगस्त में सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद घाटी में किसी विदेशी प्रतिनिधिमंडल की यह पहली यात्रा है. यह यात्रा कश्मीर की स्थिति पर यूरोपीय संसद में हुई बहस के कुछ हफ्ते बाद हो रही है, जिसमें वहां की स्थिति को लेकर चिंता जताई गई थी.

अधिकारियों का मानना है कि इस दौरे से सांसदों को पाकिस्तान के झूठे विमर्श का शिकार होने के बदले खुद से चीजों को देखने का अवसर मिलेगा. घाटी की स्थिति के बारे में पाकिस्तानी दुष्प्रचार का मुकाबला करने के लिए सरकार की यह एक बड़ी कूटनीतिक पहल है, जिसके तहत उन्हें विकास और शासन को लेकर भारत की प्राथमिकताओं के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जाएगी.

कश्‍मीर के लिए रवाना होते वक्‍त वेल्स से यूरोपीय संसद के सदस्य नाथन गिल ने कहा कि हमारे लिए यह एक अच्छा अवसर है कि हम एक विदेशी प्रतिनिधिमंडल के रूप में कश्मीर जाएं और अपने लिए पहली बार देख सकें कि यहां जमीन पर क्या हो रहा है.

पीएम मोदी से की थी मुलाकात
यूरोपीय संसद के इन सदस्यों ने अपनी दो दिवसीय कश्मीर यात्रा के पहले सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. पीएम मोदी ने स्पष्ट रूप से उन्हें बताया कि आतंकवाद का समर्थन और उसे प्रायोजित करने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है.

सही स्थिति से अवगत होंगे
एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दौरे से शिष्‍टमंडल को जम्‍मू, कश्‍मीर और लद्दाख क्षेत्र की सांस्‍कृतिक एवं धार्मिक विविधता को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी और इसके साथ ही वे इस क्षेत्र के विकास एवं शासन से संबंधित प्राथमिकताओं की सही स्थिति से अवगत होंगे.

अजीत डोभाल ने सीमा पार से आ रहे आतंकवाद के बारे में बताया
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी सांसदों को पाकिस्तान से पनपने वाले सीमा पार आतंकवाद, अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू कश्मीर के दर्जे में किए गए संवैधानिक बदलाव और घाटी की स्थिति से अवगत कराया. प्रतिनिधिमंडल में नौ देशों के सदस्य हैं.

सांसदों के भोज में कश्‍मीरी नेता भी थे
डोभाल ने यूरोपीय सांसदों के लिए सोमवार को दोपहर का भोज दिया. इसमें कुछ कश्मीरी नेता भी शामिल हुए, जिनमें जम्मू-कश्मीर के पूर्व उपमुख्यमंत्री मुजफ्फर बेग, पूर्व पीडीपी नेता अल्ताफ बुखारी, राज्य में प्रखंड विकास परिषद् (बीडीसी) के कुछ नव-निर्वाचित सदस्य और रीयल कश्मीर फुटबॉल क्लब के सह- मालिक संदीप चट्टू भी शामिल थे.

विपक्ष और कांग्रेस ने की आलोचना
इस पहल की विपक्षी दलों ने हालांकि, तीखी आलोचना की और कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि वह यूरोपीय सांसदों को वहां जाने की अनुमति दे रही है, लेकिन भारतीय नेताओं को ऐसा करने से रोक रही है, जो भारत के लोकतंत्र और इसकी संप्रभुता का अपमान है.

महबूबा मुफ्ती भारत सरकार के खिलाफ बोली
पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट किया, “उम्मीद है कि उन्हें लोगों, स्थानीय मीडिया, डॉक्टरों और नागरिक समाज के सदस्यों से बातचीत करने का मौका मिलेगा. कश्मीर और दुनिया के बीच के लोहे के आवरण को हटाने की जरूरत है. जम्मू-कश्मीर को अशांति की ओर धकेलने के लिए भारत सरकार को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए.’’ उन्होंने अमेरिकी सीनेटरों को अनुमति नहीं देने के केंद्र के फैसले पर सवाल उठाया. बता दें महबूबा अभी नजरबंदी में हैं.

सुब्रमण्यम स्वामी ने जताया आश्‍चर्य
भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट किया, “मुझे आश्चर्य है कि विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय संघ के सांसदों के लिए जम्मू-कश्मीर के कश्मीर क्षेत्र के दौरा की व्यवस्था की है. यह निजी यात्रा है (यूरोपीय संघ का आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल नहीं) . यह हमारी राष्ट्रीय नीति के खिलाफ है. मैं सरकार से इस यात्रा को रद्द करने का आग्रह करता हूं, क्योंकि यह अनैतिक है.”