EWS Quota: सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) श्रेणी घोषित करने के लिए आय मानदंड के रूप में 8 लाख रुपये तय करने के कारण केंद्र पर सवालों की बौछार कर दी और स्पष्टीकरण मांगा, क्योंकि नीट परीक्षाओं में कोटा सीटों के लिए आरक्षण का दावा किया जा रहा है. न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज से कहा, “8 लाख रुपये की आय का मानदंड तय करने का क्या कारण है? आपको दिखाना होगा कि तय करते समय आपके सामने डेटा क्या था?”Also Read - Lakhimpur Kheri violence case: सुप्रीम कोर्ट का उत्तर प्रदेश सरकार को गवाहों को सुरक्षा देने का आदेश

पीठ में शामिल जस्टिस विक्रम नाथ और बी.वी. नागरत्ना ने पूछा कि इस आय मानदंड को पूरे देश में समान रूप से कैसे लागू किया जा सकता है. जस्टिस चंद्रचूड़ ने आगे पूछा, “क्या आपने हर राज्य की प्रति व्यक्ति जीडीपी को देखा है और फिर इस आर्थिक मानदंड को तैयार किया है .. आपने 8 लाख रुपये के आंकड़े तक पहुंचने के लिए क्या अभ्यास किया?” Also Read - SBI | Uco Bank: एसबीआई और यूको बैंक आम्रपाली प्रोजेक्टों में 450 करोड़ रुपये के निवेश पर सहमत

पीठ ने एक महानगरीय शहर और एक दूरदराज के गांव में जीवन-स्तर के बीच अंतर का हवाला देते हुए कहा कि मुंबई और बेंगलुरु में रहने वाले लोगों की समान वार्षिक आय वाले लोगों की तुलना बुंदेलखंड में रहने वाले किसी व्यक्ति से नहीं की जा सकती. Also Read - SC-ST Act के मामलों को कोर्ट निरस्त कर सकती हैं, अगर अपराध निजी या दीवानी का मामला है: सुप्रीम कोर्ट

नटराज ने पीठ के समक्ष कहा कि आरक्षण लागू करना नीतिगत मामला है. पीठ ने कहा, “जब हम पूछ रहे हैं कि ईडब्ल्यूएस पात्रता के लिए 8 लाख रुपये का आधार क्या है, तब आप यह नहीं कह सकते कि यह नीति का मामला है.” केंद्र के वकील ने कहा कि ओबीसी कोटे के तहत क्रीमी लेयर के निर्धारण के लिए 8 लाख रुपये का एक ही मानदंड था. उन्होंने कहा कि 2015 में यह 6.5 लाख रुपये था और 2017 में इसे बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दिया गया.

पीठ ने दोहराया कि 8 लाख रुपये के आंकड़े तक पहुंचने के लिए क्या कोई कवायद की गई थी या इस मानदंड को ओबीसी पर लागू मानदंड से केवल यंत्रवत हटा दिया गया था? नटराज ने तर्क दिया कि इस निर्णय पर पहुंचने के लिए विचार-विमर्श किया गया था उचित नोटिंग के साथ और इसे कैबिनेट द्वारा अनुमोदित किया गया था.

हालांकि, जवाब से संतुष्ट न होते हुए पीठ ने इसके लिए किए गए समसामयिक अध्ययन का हवाला देने को कहा. पीठ ने कहा, “अधिसूचना विशेष रूप से 8 लाख रुपये सीमा का विज्ञापन करती है. अब आपके पास 17 जनवरी का कार्यालय ज्ञापन है, जिसमें संपत्ति के साथ 8 लाख रुपये का जिक्र है.”

इसने आगे पूछा, “क्या केंद्र संपत्ति सह आय की आवश्यकता को लागू कर रहा है?” नटराज ने पीठ द्वारा पूछे गए प्रश्नों के समाधान के लिए हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा.

सुनवाई के दौरान पीठ ने इंद्रा साहनी फैसले (मंडल मामला) में कहा कि जिन लोगों की आय 8 लाख रुपये से कम थी, वे शैक्षिक और सामाजिक रूप से पिछड़ेपन और आर्थिक पिछड़ेपन की कसौटी पर खरा उतरे. शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 20 अक्टूबर को निर्धारित की है.

शीर्ष अदालत ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण और स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए अखिल भारतीय कोटा सीटों में ईडब्ल्यूएस के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण के खिलाफ नील ऑरेलियो नून्स और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियां कीं. एनईईटी के माध्यम से चुने गए उम्मीदवारों में से एमबीबीएस में 15 प्रतिशत सीटें और एमएस और एमडी पाठ्यक्रमों में 50 प्रतिशत सीटें अखिल भारतीय कोटा के माध्यम से भरी जाती हैं.

(आईएएनएस)