मुंबई| भारतीय वायुसेना के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल पी वी नाइक ने जम्मू कश्मीर में आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए ‘‘सख्त कदमों’’ की वकालत की है जिनमें वायु शक्ति का उपयोग और विशेष जोन शामिल हैं जहां घुसपैठियों को बिना किसी चेतावनी के मारा जा सके. नाइक ने पीटीआई से बातचीत करते हुए कई उपाय सुझाए और कहा कि इन कदमों का कुछ महीनों के राज्यपाल शासन में बेहतर तरीके से कार्यान्वयन किया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि अगर परिस्थितियों की मांग है तो हमें कठोर फैसले लेने होंगे. एक राष्ट्र के रूप में हममें कठोरता की कमी है. नाइक 2009 से 2011 के बीच वायुसेना के प्रमुख थे. उन्होंने कहा कि वायु शक्ति का अधिक प्रभावी इस्तेमाल होना चाहिए था और घाटी में इसका बहुत इस्तेमाल नहीं किया गया है.

नाइक का यह आक्रामक बयान थलसेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के बयान के बाद आया है. रावत ने पिछले महीने कहा था, “यह एक छद्म युद्ध है और छद्म युद्ध एक घृणित युद्ध है.’’ आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जम्मू कश्मीर में 2016 से आतंकवाद विरोधी अभियानों में 59 सैन्यकर्मी शहीद हुए हैं. इस साल घुसपैठ के 22 प्रयासों को नाकाम किया गया और नियंत्रण रेखा पर 34 सशस्त्र घुसपैठिए मारे गए.

नाइक ने कहा कि नियंत्रण रेखा के पास घुसपैठ की आशंका वाले क्षेत्रों में रेड जोन की घोषणा की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर हमें कश्मीर घाटी में आतंकवाद पर नियंत्रण करना है तो हमें ऐसे विचारों पर गौर करना चाहिए.

नाइक वायुसेना से अवकाश ग्रहण करने के बाद पुणे में रह रहे हैं. उन्होंने कहा कि विदेशी आतंकवादियों को ‘‘खोजने और नष्ट करने’’ के लिए स्पष्ट आदेश के साथ विशेष बलों की तैनाती की जानी चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘घाटी में करीब 250 विदेशी आतंकवादी हैं. खेजने और नष्ट करने के स्पष्ट आदेश के साथ विशेष बलों का उपयोग किया जाना चाहिए. यह तभी संभव होगा जब सेना स्थानीय लोगों के साथ खुफिया ढांचा फिर से स्थापित करे. कुछ महीनों के राज्यपाल शासन से इस गतिविधि में सहूलियत होगी.

उन्होंने कश्मीर के लिए मानवरहित विमान (यूएवी), युद्धक हेलीकाप्टर और अमेरिकी वायुसेना के विमान एसी.130 की तर्ज पर खास विमानों के उपयोग का भी सुझाव दिया.

नाइक ने विभिन्न सुझावों के साथ यह भी कहा कि शासन में सुधार के बिना कश्मीर मुद्दे का हल नहीं हो सकता. उन्होंने विभिन्न विभागों के कामकाज में सुधार, उच्च कुशलता सुनिश्चित करना और लोगों तक पहुंच कायम किए जाने पर भी बल दिया. उन्होंने कहा कि सरकार को मीडिया पर अंकुश लगाना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भडकाउ कार्यक्रमों का प्रसारण नहीं हो. उन्होंने कहा, ‘‘मैंने अधिकतर सैन्य चीजों के बारे में बात की लेकिन स्थिति की मांग मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और जनसमर्थन भी है.’’