जामनगर: पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को 1990 में हिरासत में हुई मौत के एक मामले में गुजरात की एक अदालत ने गुरुवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. यह मामला 1990 का है, जब भट्ट गुजरात के जामनगर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थे. भट्ट इस समय एक व्यक्ति को मादक पदार्थ अपने पास रखने को लेकर फंसाने के आरोप में एक अन्य मामले में जेल में हैं.

बता दें कि गुजरात में 2002 में हुए दंगों में राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका के खिलाफ भट्ट ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी. भट्ट को भारतीय पुलिस सेवा से 2011 में निलंबित कर दिया गया और सेवा से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के कारण उन्हें अगस्त 2015 में गृह मंत्रालय ने बर्खास्त कर दिया था.

जामनगर स्थित सत्र अदालत के न्यायाधीश डी एन व्यास ने हिरासत में मौत के 29 साल पुराने मामले में भट्ट और पुलिस कांस्टेबल प्रवीण सिंह जाला को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत दोषी ठहराया और उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई.

कोर्ट ने पांच अन्य पुलिसकर्मियों- उप निरीक्षक दीपक शाह और शैलेष पांडया, कांस्टेबल प्रवीणसिंह जडेजा, अनूपसंह जेठवा और केशुभा जडेजा को भी मामले में दोषी ठहराया तथा दो साल कैद की सजा सुनाई.

बता दें कि 30 अक्टूबर 1990 को तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भट्ट ने जामजोधपुर कस्बे में हुए एक सांप्रदायिक दंगे के बाद करीब 150 लोगों को हिरासत में लिया था. अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी की रथयात्रा रोके जाने के खिलाफ आह्वान किए गए बंद के बाद यह दंगा भड़का था. इनमें से एक प्रभुदास वैशनानी नाम के एक शख्स की हिरासत से रिहा किए जाने के बाद अस्पताल में मौत हो गई थी.

वैशनानी के भाई ने बाद में भट्ट और छह अन्य पुलिसवालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा कर आरोप लगाया था कि उन्होंने हिरासत के दौरान उसके भाई को यातनाएं दी गई, जिसकी वजह से उसकी मौत हुई. मुकदमे के दौरान अभियोजक तुषार गोकणी ने दलील दी कि मृतक की यातनाएओं में भट्ट की भूमिका जाहिर है.

भट्ट के खिलाफ यह मामला बरसों से लंबित था, क्योंकि उनके और अन्य के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी राज्य सरकार ने नहीं दी थी. सरकार ने बाद में यह मंजूरी दी. भट्ट को 23 साल के एक अन्य व्यक्ति को मादक पदार्थ रखने के आरोप में फंसाने के मामले में पांच सितंबर 2018 को गिरफ्तार किया गया था. यह मामला फिलहाल विचाराधीन है.