‘वन रैंक, वन पेंशन’ के मुद्दे पर सेना के एक पूर्व सैनिक राम किशन ग्रेवाल ने मंगलवार देर रात सुसाइड कर लिया। इस घटना के बाद बुधवार देर रात तक सियासी संग्राम जारी रहा। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष सिसौदिया को हिरासत में भी लिया गया। मृतक के परिजनों से किसी नेता को मिलने से रोका जा रहा है। केंद्र सरकार एक ओर जहाँ दावे कर रही है कि हमने ओआरओपी लागू करके बहुत बड़ा काम किया है तो वहीं दिल्ली के सीएम का कहना है कि पीएम मोदी वन रैंक वन पेंशन पर सैनिकों के साथ दोखेबाजी कर रही है। इस पूरे घटनाक्रम में एक सवाल कहीं दब सा गया है कि अगर मोदी सरकार ने 40 सालों से अटकी ‘वन रैंक, वन पेंशन’ स्कीम को लागू कर दिया है तो राम किशन ग्रेवाल ने आत्महत्या क्यों की? आइए, जवाब तलाशने की कोशिश करते हैं…Also Read - Ex Serviceman OROP Suicide matter: Arvind Kejriwal Annouces 1 crore help for family members | सुसाइड करने वाले पूर्व सैनिक राम किशन का हुआ अंतिम संस्कार, केजरीवाल ने परिजनों को 1 करोड़ देने की घोषणा की

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केंद्र सरकार के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने पूर्व सैनिक की मौत पर मचे सियासी बवाल के बीच साफ किया कि सरकार वन रैंक वन पेंशन का वादा पूरा कर रही है। उन्होंने कहा कि 5,504.47 करोड़ रुपए ओआरओपी के तहत बाँटे जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि 19,12,520 पूर्व सैनिकों को पहली किश्त दी जा चुकी है। 1,50,313 केस वेरिफिकेशन के लिए अभी पेंडिंग हैं जिनपर तेजी से काम किया जा रहा है।

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वन रैंक वन पेंशन एक ऐसी स्कीम है जिसमें कोई भी फौजी किसी भी वक्त रिटायर हुआ हो लेकिन उसकी रैंक के हिसाब से उसे समान पेंशन का हक होगा। इसकी मांग पिछले करीब 40 साल से की जा रही थी लेकिन पुरानी सरकारें टालती आ रही थी। मोदी सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए इस पर अमल किया और सितंबर 2015 में वन रैंक वन पेंशन का ऐलान कर दिया। एकसाथ लागू करने पर सरकारी खजाने पर ज्यादा बोझ पड़ता इसलिए इसे 6-6 महीने में 4 किस्तों में लागू करने का वादा किया गया।

अभी भी पूर्व सैनिक क्यों कर रहे हैं विरोध…?

वन रैंक वन पेंशन लागू होने के बावजूद पूर्व सैनिक अभी भी कुछ मुद्दों पर सुधार चाहते हैं इसी के चलते वे विरोध कर रहे हैं…

  • वन रैंक वन पेंशन का बेस इयर 2013 माना गया है जिसे 2015 किया जाए।
  • इस स्कीम की समीक्षा हर पांच साल में किए जाने का प्रावधान है। लेकिन पूर्व सैनिकों की मांग है कि हर 2 साल में इसकी समीक्षा की जाए।
  • इस मामले में सबसे बड़ा झोल ये है कि सरकार का कहना कि स्वैच्छिक रिटायरमेंट (वीआरएस) लेने वाले सैनिकों को इसका लाभ नहीं मिलेगा लेकिन इस पर पूर्व सैनिकों को ऐतराज है। उनका कहना है कि 40 प्रतिशत आर्मी मैन स्वेच्छा से रिटायरमेंट लेते हैं। इसलिए एक बड़े तबके को इससे वंचित नहीं रखना चाहिए।
  • मोदी सरकार ने 2013 तक के न्यूनतम और अधिकतम पेंशन का औसत निकालकर ओरआरओपी पेंशन देना तय किया है लेकिन सैनिकों की मांग है कि ज्यादा पेंशन को आधार बनाया जाए।

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राम किशन के सुसाइड की और क्या वजह हो सकती हैं…?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रक्षा मंत्रालय का मानना है कि राम किशन वन रैंक वन पेंशन स्कीम के तहत लाभार्थी थे। लेकिन बैंक की कुछ कमी के चलते उनको अभी तक पूरा पैसा नहीं मिल सका था। ऐसे में उनके सुसाइड की ये पांच वजहें भी हो सकती हैं…

  • वन रैंक वन पेंशन लागू तो हो गई लेकिन बढ़ोत्तरी का पैसा अभी तक न मिल पाना।
  • पद के अनुसार साथ वालों को ज्यादा पेंशन मिलना.
  • सरकार को कई बार ज्ञापने सौंपने के बाद भी कोई सुनवाई न होना।
  • आत्महत्या की बात लिखने पर भी कोई ध्यान नहीं दिया गया।
  • परिवार की आर्थिक स्थिति का ठीक न होना। पूर्व सैनिक के चारों बेटे बेरोजगार थे।
  • खुदकुशी से पहले रामकिशन ने बेटे से फोन पर बात की थी। इस बातचीत की रिकॉर्डिंग सामने आई है। कामकिशन अपने बेटे को बता रहे हैं कि उन्होंने सल्फास की गोलियां खा ली हैं। उन्होंने कहा कि देश में पूर्व सैनिकों पर अत्याचार हो रहा है।