नई दिल्‍ली: अर्थशास्‍त्र का नोबल पुरस्‍कार जीतने के बाद भारत आए अभिजीत बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है. इस बारे में पीएम मोदी ने ट्वीट कर बताया कि नोबल विजेता अभिजीत बनर्जी के साथ शानदार मुलाकात रही. उनकी चाहत मानव उत्‍थान के प्रति साफ दिखाई देती है. विभिन्‍न विषयों पर हमारे बीच एक स्‍वस्‍थ और विस्‍तृत संवाद हुआ. भारत को उनकी उपलब्‍धि पर गर्व है. उनके बेहतरीन भविष्‍य के लिए बहुत- बहुत शुभकामनाएं. बता दें बनर्जी को उनकी पत्‍नी समेत 14 अक्टूबर को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा की गई थी.

पीएम मोदी ने ट्वीट कर  लिखा, “नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी के साथ उत्कृष्ट बैठक. मानव सशक्तीकरण के प्रति उनका जुनून स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. हमने विभिन्न विषयों पर एक स्वस्थ और व्यापक बातचीत की. भारत को उनकी उपलब्धियों पर गर्व है. उन्हें उनके भावी प्रयासों के लिए बहुत- बहुत  शुभकामनाएं.”

 

बनर्जी अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में प्रोफेसर हैं. वह और उनकी पत्नी एस्थर डुफ्लो इस साल के अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार के विजेता रहे हैं. बनर्जी फिलहाल अपनी नई पुस्तक ‘गुड इकोनॉमिक्स फॉर हार्ड टाइम्स : बेटर आंसर्स टू अवर बिग्स प्रॉब्लम’ के प्रचार के लिए भारत दौरे पर हैं.

लोकसभा चुनाव से पहले बनर्जी ने कांग्रेस की न्यूनतम आय योजना (एनवाईएवाई) या न्यूनतम आय गारंटी योजना तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

कुछ कैबिनेट मंत्री सहित बीजेपी के कई नेता हालांकि बनर्जी के काम के आलोचक रहे हैं. पिछले हफ्ते पुणे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रेलवे और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि बनर्जी की वामपंथी झुकाव वाली मानसिकता है और उनके विचारों को भारत ने खारिज कर दिया है.

अभिजीत ने नई दिल्‍ली में एक दिन पहले ही एक कार्यक्रम में कहा था, ” मेरी राय में मोदी को कॉरपोरेट जगत पर मुझसे ज्यादा भरोसा है. कर की दरों में हाल की कटौती से यह दिखता है कि सरकार में कोई ऐसा व्यक्ति है, जो मानता है कि आप कंपनियों को पैसे देंगे तो उससे वृद्धि तेज होगी, लेकिन मैं इसमें यकीन नहीं रखता हूं.

नोबेल विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने सोमवार को कहा था कि भारत में मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने की सरकार की कठोर प्रतिबद्धता के चलते कृषि क्षेत्र के सामने संकट खड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि राजकोषीय घाटे को सीमित रखने के लिए विनिवेश कोई दीर्घकालिक निदान नहीं है.

बनर्जी ने कहा था कृषि क्षेत्र के मौजूदा संकट के बारे में कहा कि इसकी वजह मुद्रास्फीति पर अंकुश रखने की प्रतिबद्धता है. बैंकिंग क्षेत्र के बारे में उनकी राय है कि इस क्षेत्र में निर्णय प्रक्रिया बिल्कुल ठप हो गई है. इस कारण यह क्षेत्र संकट में है.

बनर्जी अपनी मां निर्मला बनर्जी से मिलने के लिए कोलकाता पहुंच रहे हैं. बनर्जी दो दिन तक शहर में रहेंगे. स्वयं अर्थशास्त्री निर्मला बनर्जी ने कहा कि वह उस कमरे को खुद तैयार कर रही हैं जहां उनका बड़ा बेटा ठहरेगा.