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लखनऊ /कानपुर: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सटे उन्नाव जिले में मौजूद एक बाघ को पकड़ने के लिए विशेषज्ञों की टीम पिछले एक सप्ताह से जुटी हुई है, लेकिन बाघ हर बार टीम को छकाने में कामयाब हो जाता है। इस बीच, बीती रात बाघ के गंगा बैराज के पास कानपुर कटरी में होने की सूचना पर लोगों के बीच हड़कंप मच गया। विशेषज्ञों की टीम सात दिन के प्रयास में उसके नए ठिकाने का पता नहीं लगा पाई है। सिर्फ उसके पंजे के निशान पर टीमें कभी गढ़ी सिलौली के जंगल तो कभी उन्नाव जिले के शंकरपुर में भटक रही है। Also Read - यूपी का बिकरू हत्याकांड: जब्‍त हथियारों में कई लोगों के फिंगरप्रिंट्स मिले, क्‍या सजा दिलाने में होगी मुश्‍किल?

कानपुर कटरी में बाघ के होने की आशंका के बीच कानपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर क्षेत्र में घेराबंदी शुरू कर दी गई है। Also Read - BSP सुप्रीमो मायावती ने 7 बागी विधायकों को किया सस्‍पेंड, कहा- सपा को हराने बीजेपी का भी समर्थन करेंगे

इधर, कानपुर के ग्वालटोली क्षेत्र के मंगलपुरवा के पास गंगा किनारे बाघ के पंजे के निशान मलने की बात सामने आ रही है। इसके बाद कानपुर पुलिस ने आधा दर्जन से अधिक गांवों के निवासियों को सतर्क कर दिया है।

गौरतलब है कि पिछले सात दिनों से बाघ की खोजबीन में नई दिल्ली स्थित वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया और लखनऊ के प्राणी उद्यान की टीमें लगी हैं।

टीम के मुताबिक, सोमवार को गंगाघाट क्षेत्र के शंकरपुर तक बाघ के पंजे के निशान मिले थे। अब दो दिनों से बाघ न तो ग्रामीणों को नजर आया और न ही उसके पंजे के नए निशान मिले हैं।

विशेषज्ञ टीम का नेतृत्व कर रहे डा़ उत्कर्ष शुक्ल ने बताया कि शंकरपुर गांव से गढ़ी की ओर वापस आने के पंजे के निशान थोड़ी दूर तक मिले हैं। शुक्ल के मुताबिक यहां अभी भी छह कैमरे लगे हैं। मुख्य वन संरक्षक ईवा शर्मा ने गढ़ी सिलौली में विशेषज्ञों की टीम के साथ जंगल का निरीक्षण किया।