'लोकतंत्र में उग्रवाद की कोई जगह नहीं', खालिस्तान मुद्दे पर PM मोदी ने यूके के प्रधानमंत्री को दिया कड़ा संदेश

Khalistan in Britain: पीएम मोदी और स्टारमर की यह बैठक आतंकवाद, कट्टरपंथ और सुरक्षा की वैश्विक चुनौतियों से निपटने की प्रतिबद्धता का एक नया उदाहरण है.

Published date india.com Updated: October 9, 2025 8:01 PM IST
'लोकतंत्र में उग्रवाद की कोई जगह नहीं', खालिस्तान मुद्दे पर PM मोदी ने यूके के प्रधानमंत्री को दिया कड़ा संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के बीच गुरुवार को हुई बातचीत में खालिस्तानी कट्टरपंथ मुद्दे पर खास ध्यान दिया गया. विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने मीडिया से कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री को स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक समाजों को दी गई स्वतंत्रताओं का कट्टरपंथ और हिंसक उग्रवाद के इस्तेमाल या दुरुपयोग की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि खालिस्तानी उग्रवाद जैसी कट्टरतावादी गतिविधियों के खिलाफ दोनों देशों को अपने कानूनी ढांचे के तहत कड़े कदम उठाने की जरूरत है.

लोकतंत्र में उग्रवाद की कोई जगह नहीं

प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुद्दे पर जोर देते हुए कहा कि लोकतंत्र में उग्रवाद की कोई जगह नहीं, और इसे किसी भी कीमत पर टॉलरेट नहीं किया जाना चाहिए. दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता और सामूहिक अंतरराष्ट्रीय प्रयासों की आवश्यकता पर भी सहमति जताई. यह वार्ता भारत-यूके संबंधों को मजबूत करते हुए सुरक्षा और व्यापार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के मकसद से हुई. यह गंभीर मुद्दा तब उभरा है जब भारत ने यूके में खालिस्तानी उग्रवादी गतिविधियों को लेकर कई बार अपनी चिंता जताई है, खासकर लंदन में भारतीय उच्चायोग पर हुई हरकतों के बाद.

भारत में खुलेंगे 2 नए ब्रिटिश विश्वविद्यालय

पीएम मोदी और स्टारमर की यह बैठक आतंकवाद, कट्टरपंथ और सुरक्षा की वैश्विक चुनौतियों से निपटने की प्रतिबद्धता का एक नया उदाहरण है. ब्रिटेन के 125 प्रमुख उद्योगपतियों और शिक्षाविदों के साथ कीर स्टारमर की यह दो दिवसीय यात्रा भारत-यूके संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से है. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने गुरुवार को घोषणा की कि ब्रिटिश विश्वविद्यालय भारत में अपने परिसर स्थापित करेंगे. ब्रिटेन अब तक भारत में नौ विश्वविद्यालयों के कैंपस खोल चुका है, जिनमें यूनिवर्सिटी ऑफ साउथाम्पटन, यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क, और क्वीन यूनिवर्सिटी बेलफास्ट शामिल हैं. यह कदम शिक्षा क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देगा और दोनों देशों के बीच विश्वास व समर्पण को और पुख्ता करेगा. पीएम मोदी ने इसे भारत और ब्रिटेन के बीच ‘प्राकृतिक साझेदारी’ और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित मजबूत रिश्ते का हिस्सा बताया.

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