नई दिल्ली. यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने नई घोषणा करते हुए चेहरे के पहचान (फेस रिकग्निशन) को अनिवार्य कर दिया है. इसके साथ ही अब आधार को प्रमाणित करने के लिए फेस रिकग्निशन की जरूरत होगी ही. इसे कई चरणों में लागू किया जाएगा. पहला चरण 15 सितंबर से लागू होगा. Also Read - PAN, Aadhaar and Voter ID Card: किसी की मौत के बाद क्या करें पैन, आधार और वोटर आईडी कार्ड?

इस नई व्यवस्था के बाद ऐसी सर्विस जिसके लिए आधार प्रमाणिकता की जरूरत होती है, वहां से तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगा. इसमें मोबाइल सिमकार्ड, बैंक, सार्वजनिक वितरण और सरकारी दफ्तरों की हाजिरी जैसी सर्विस शामिल हैं. Also Read - Driving license Online: महाराष्ट्र में अब घर बैठे पाएं लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस, ऑनलाइन ऐसे करें आवेदन

सूत्रों के अनुसार, फेस रिग्निशन को दूसरे प्रमाणिता प्रोसेस जैसे फिंगरप्रिंट या आंखों के स्कैन के साथ ही रखा गया है. इस प्रोसेस में फेल व्यक्ति के ऊपर आपराधिक केस दर्ज होगा. उसे आधार एक्ट 2016 के सेक्शन 42-43 के अंतर्गत जेल तक की सजा हो सकती है. Also Read - How to Download Aadhar Card? घर बैठे ऐसे कर सकते हैं डाउनलोड | Watch Video

UIDAI ने इस नई व्यवस्था की पुष्टि की है. उसके मुताबिक, इस नई व्यवस्था का कारण सिक्युरिटी लेयर को एक स्टेप और बढ़ाना है. ऐसे कई मामले आते हैं जिसमें उम्र बढ़ने के साथ व्यक्ति के फिंगरप्रिंट चले जाते हैं या फिर ऐसे लोग जो मजदूर या किसानी करते हैं उनके भी चले जाते हैं. ऐसे स्थिति में उनका फिंगर प्रिंट लेने में कठिनाई होती है. फेस रिकग्निशन से वे भी इस आईडेंटिफिकेशन के अंतर्गत आ जाएंगे.

फेस रिकग्निशन को कई चरणों में अनिवार्य किया जाएगा. शुरुआत में ये सिमकार्ड और टेलिकॉम कंपनियों के लिए अनिवार्य होगा. उन्हें कहा गया है कि 15 सितंबर से इसे लागू किया जाए और महीने में कम से कम 10 फीसदी इसी पद्धति से करें.