नई दिल्ली. ट्रेनों के एसी कोच में धोए जाने वाले कंबलों के इस्तेमाल के चलन की शुरुआत करने के बाद अब रेलवे ने यात्रियों को फेस टॉवेल (तौलिया) देने का वैकल्पिक रास्ता भी ढूंढ़ लिया है. एसी कोच में सफर करने वालों को अब यात्रा के दौरान रेलवे की तरफ से फेस टॉवेल नहीं दिए जाएंगे. इसकी जगह पर सस्ती, छोटी और एक ही बार इस्तेमाल करने योग्य नैपकिन देने की योजना बनाई गई है. एसी कोच में दिए जाने वाले फेस टॉवेल को बार-बार धोने और इसके बाद इस्तेमाल करने की प्रक्रिया से बचने के लिए रेलवे ने यह व्यवस्था की है. रेलवे का मानना है कि बार-बार धोए जाने वाले फेस टॉवेल की जगह, एक ही बार इस्तेमाल कर फेंक दिए जाने वाले नैपकिन से रेलवे का राजस्व भी बचेगा और यात्रियों को सुविधा भी होगी. मुसाफिरों को गंदे फेस टॉवेल मिलने की शिकायतों से भी निजात मिल जाएगी.

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रेलवे बोर्ड ने दिया नैपकिन के प्रयोग का आदेश
ट्रेन के एसी कोच में फेस टॉवेल बंद कर नैपकिन इस्तेमाल करने संबंधी आदेश रेलवे बोर्ड ने दिया है. बोर्ड द्वारा जारी एक आदेश के मुताबिक एसी डिब्बों में यात्रा करने वाले यात्रियों को जो फेस टॉवेल दिए जाते हैं, उनकी जगह पर अब सस्ते, छोटे और एक बार इस्तेमाल योग्य नेपकिन दिए जाएंगे. रेलवे का कहना है कि यात्रियों के लिए सफर के अनुभव को और बेहतर बनाने की ओर ध्यान देने के क्रम में यह व्यवस्था की जा रही है. फेस टॉवेल इस्तेमाल करने संबंधी यह आदेश बीते 26 जून को ही सभी रेलवे जोनों के महाप्रबंधकों को भेजा गया है.

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फेस टॉवेल न देकर साढ़े 3 रुपए बचाएगी रेलवे
रेलवे के देशभर के सभी जोनों के महाप्रबंधकों को बोर्ड की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि नए नैपकिन पर खर्च कम आएगा, क्योंकि उन्हें थोक में खरीदा जा सकता है और वह आकार में भी छोटे होंगे. फिलहाल फेस टॉवेल पर जो खर्च आता है वह प्रति टॉवेल 3.53 रुपए है. रेलवे का मानना है कि नैपकिन के इस्तेमाल से तौलियों को धोने पर खर्च होने वाले पैसे बचेंगे. एसी डिब्बों में यात्रा करने वालों के टिकट में बेडरोल की कीमत शामिल होगी. बता दें कि कुछ महीने पहले रेलवे बोर्ड ने एसी डिब्बों में यात्रा करने वालों को नायलॉन के कंबल उपलब्ध कराने का सभी जोनों को आदेश दिया था और अब कॉटन के बिना बुनाई वाले फेस टॉवल देने को कहा है.

(इनपुट – एजेंसी)