नई दिल्ली. कैंब्रिज एनालिटिका नामक ब्रिटेन की एक कंपनी ने फेसबुक के 5 करोड़ यूजर्स का डाटा चोरी किया और इसका अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान व्यावसायिक इस्तेमाल किया. दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक के डाटा लीक प्रकरण की आंच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव अभियान से लेकर भारत में बिहार के विधानसभा चुनाव तक पहुंची. कांग्रेस और भाजपा एक-दूसरे पर इस डाटा के आधार पर चुनाव जीतने-हारने का आरोप लगाने लगे. मामले ने इतना तूल पकड़ा कि भारत के कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को कार्रवाई की धमकी दे डाली. इसी बीच वैश्विक मीडिया में इस खबर के आने के बाद बीते मंगलवार को कैंब्रिज एनालिटिका ने अपने चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर अलेक्जेंडर निक्स को सस्पेंड कर दिया. अंततः मार्क जुकरबर्ग ने एक पोस्ट लिखकर डाटा सुरक्षित न रखने को लेकर माफी मांगी. लेकिन डाटा लीक प्रकरण पर बहस छिड़ चुकी है. इसके मद्देनजर इस पूरे प्रकरण पर आइए डालते हैं एक नजर. Also Read - लॉकडाउन को फेल बताने पर राहुल गांधी पर बीजेपी का पलटवार: झूठ नहीं फैलाएं, दुनिया के आंकड़े देखें

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कैसे लीक हुआ डाटा

फेसबुक के अनुसार कैंब्रिज के एक शिक्षक अलेक्जेंडर कोगान ने पर्सनैलिटी क्विज के लिए कानूनी तौर पर फेसबुक से डाटा लिया था. लेकिन बाद में नियम का उल्लंघन कर उन्होंने ये डाटा कैंब्रिज एनालिटिका को दे दिया. फेसबुक को इसकी खबर थी, लेकिन उसने कोई कार्रवाई नहीं की. अलबत्ता डाटा लेने वाले सभी पार्टियों से कहा कि यूजर्स का डाटा डिलीट कर दें. रिपोर्ट के मुताबिक कुछ डाटा डिलीट किया गया, लेकिन सारा नहीं. न्यू यॉर्क टाइम्स के मुताबिक ये आंकड़ा लगभग 5 करोड़ लोगों के डाटा का है. डाटा के एवज में कैंब्रिज एनालिटिका ने कोगान को 8 लाख डॉलर यानी लगभग 5 करोड़ से ज्यादा रुपए दिए. इसके अलावा कंपनी ने अलेक्जेंडर कोगान को उनकी रिसर्च की एक कॉपी भी रखने दी. इसी डाटा के बारे में कहा जा रहा है कि कैंब्रिज एनालिटिका ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव में इसका इस्तेमाल किया.

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मामले पर से यूं उठा पर्दा

ब्रिटेन के एक समाचार चैनल ने एक वीडियो जारी किया था, जिसमें कैंब्रिज एनालिटिका के सीईओ अलेक्जेंडर निक्स एक क्लाइंट को विदेशी चुनाव में कैसे मदद पहुंचाएं, इसके टिप्स देते नजर आ रहे हैं. वीडियो में वे कहते नजर आ रहे हैं कि किस तरह विपक्षी उम्मीदवार को कंपनी ‘हनी ट्रैप’ में फंसाती है. इस वीडियो के जारी होते ही दुनियाभर में बवाल मच गया. भारत में भी इसको लेकर सत्तारूढ़ भाजपा की ओर से केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विपक्षी कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाया कि वह फेसबुक के डाटा चुराकर चुनाव जीतना चाहती है. प्रसाद ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के प्रोफाइल में कैंब्रिज एनालिटिका का जिक्र होने पर सवाल उठाए. इसके जवाब में कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसने 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान सहयोगी जदयू के साथ मिलकर कैंब्रिज एनालिटिका कंपनी की मदद से चुनाव जीता था.

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सीन में जदयू नेता के बेटे का नाम कैसे आया

दरअसल, कैंब्रिज एनालिटिका ब्रिटेन की स्ट्रैटजिकल कम्युनिकेशंस लेबोरेट्रीज (एससीएल) कंपनी से संबद्ध है. इस कंपनी की भारतीय सहयोगी कंपनी ओवलेन बिजनेस इंटेलीजेंस प्राइवेट लिमिटेड है, जिसके सीईओ अमरीश त्यागी हैं. अमरीश त्यागी जदयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी के बेटे हैं. कांग्रेस ने इसी कंपनी के साथ जदयू और भाजपा के संबंध होने का आरोप लगाया था. इसके अलावा कैंब्रिज एनालिटिका की वेबसाइट पर भी 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कंपनी के चुनाव विश्लेषणों से संबंधित काम करने का जिक्र है. वहीं, मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक खुद अमरीश त्यागी भी यह बात कबूल कर चुके हैं कि वे डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव अभियान के दौरान अमेरिका में रहे थे. इन सारी बातों के आधार पर जदयू भी इस प्रकरण से जुड़ गया, जिसके बाद पार्टी ने केसी त्यागी से इस संबंध में जवाब मांगा है.

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चौतरफा घिरा फेसबुक तो जुकरबर्ग ने मांगी माफी

डाटा लीक प्रकरण पर दुनियाभर में छीछालेदर के बाद अंततः कंपनी के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने बुधवार को फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर माफी मांग ली. कैंब्रिज एनालिटिका की धोखाधड़ी को लेकर जुकरबर्ग ने कहा कि फेसबुक हजारों एप्लीकेशंस की जांच करेगा. उन्होंने कहा कि लोगों का डाटा सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेवारी है. अगर हम डाटा सुरक्षित नहीं रख पाते हैं तो यह हमारी गलती है. जुकरबर्ग ने यह भी कहा कि कैंब्रिज एनालिटिका भी इस संबंध में कई कदम उठा रही है और भविष्य में भी कड़े कदम उठाएगी.