Facebook India Policy Head Ankhi Das Quits : सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक की सार्वजनिक नीति मामलों की प्रमुख अंखी दास ने पद से इस्तीफा दे दिया है. वह सोशल मीडिया मंच पर नफरत फैलाने वाली टिप्पणियों को लेकर पाबंदी लगाने के मामले में कथित पक्षपात करने को लेकर चर्चा में थीं. Also Read - Data Controversy: संसद की समिति ने फेसबुक, ट्विटर को भेजा समन

फेसबुक के भारत में प्रबंध निदेशक अजीत मोहन ने ई-मेल के जरिये बयान में कहा, ‘‘अंखी दास ने फेसबुक में अपने पद से हटने का निर्णय किया है. उन्होंने जन सेवा में अपनी रुचि के अनुसार काम करने के लिये यह कदम उठाया है. अंखी हमारे उन पुराने कर्मचारियों में शामिल हैं, जिन्होंने कंपनी को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभायी….’’ Also Read - Facebook Neighborhoods Feature: Facebook ला रहा खास फीचर, पड़ोसियों के बारे में जानना होगा आसान

अंखी दास उस समय चर्चा में आ गईं थीं जब वॉल स्ट्रीट जर्नल में फेसबुक की इंडिया को लेकर पॉलिसी पर एक लेख छपा था. इस लेख के बाद कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग को चिट्ठी लिखी थी. इसमें वॉल स्ट्रीट जर्नल के आलेख का जिक्र किया गया था. वेणुगोपाल ने कहा कि फेसबुक इंडिया की अधिकारी अंखी दास ने चुनाव संबंधी कार्यो में भाजपा को मदद पहुंचाई थी. ऐसे में कांग्रेस फेसबुक इंडिया ऑपरेशन की जांच की मांग करती है. Also Read - वकील दीपिका राजावत ने नवरात्र के अवसर पर की विवादित टिप्पणी, घर के बाहर इक्ट्ठा हुए लोग

ये है पूरा मामला
विपक्षी कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और सोशल मीडिया दिग्गज फेसबुक के बीच ‘अपवित्र सांठगांठ’ है. पार्टी ने कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और सांसदों के साथ फेसबुक एग्जीक्यूटिव अंखी दास का कनेक्शन उजागर हुआ है.

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए जुलाई 2012 के एक मेमो का हवाला दिया था. यह एक बंद दरवाजे की बैठक में मध्यस्थ नियमों के संदर्भ में फेसबुक में तत्कालीन पब्लिक पॉलिसी ग्लोबल वाइस प्रेसिडेंट मार्ने लेविने द्वारा लिखित था. इसमें कहा गया है कि तत्कालीन केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल और संसद के विपक्षी सदस्यों को इन नियमों पर चर्चा करनी थी.

खेड़ा ने आरोप लगाया कि आंतरिक मेल से पता चलता है कि जब संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सत्ता में थी, तब भाजपा और फेसबुक के बीच एक संबंध था. उन्होंने कहा कि इसी मेमो में गोपनीयता कानून का उल्लेख किया गया था, जिसे सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति ए. पी. शाह की अध्यक्षता में ‘ग्रुप ऑफ एक्सपर्ट्स ऑन प्राइवेसी’ द्वारा तैयार किया गया था.

खेड़ा ने मेमो के हवाले से कहा, अंखी (दास), सरकार द्वारा नियुक्त समिति के सदस्यों के साथ संपर्क में थीं. समिति के सदस्य डीपीए की संरचनाओं और शक्तियों के बारे में बहुत स्पष्ट नहीं थे. कांग्रेस ने कहा कि उसे संप्रग सरकार पर गर्व है, जिसने लॉबिस्टों (लॉबी करने वाले) के साथ संबंध नहीं रखे जैसा कि मेल में कहा गया है.

पार्टी ने कहा कि फेसबुक इंडिया की पब्लिक पॉलिसी प्रमुख अंखी दास ने 2014 के लोकसभा परिणाम घोषित होने के एक दिन बाद 17 मई 2014 को एक लेख लिखा था. पार्टी ने दास के लेख के हवाले से कहा, भारत के 2014 के चुनावों को कई कारणों से याद किया जाएगा, लेकिन विशेष रूप से यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के कारण याद किया जाएगा. जो कि 2011 से सरकारी सेंसरशिप के साथ जुड़े हैं और महत्वपूर्ण राजनीतिक अभियान उपकरण के साथ ही राजनीतिक अभिव्यक्ति और आयोजन के लिए मुफ्त में एक जगह बन गए. हमने चार मार्च को इलेक्शन ट्रैकर लॉन्च किया और इसमें भाजपा लगातार पूरे अभियान में नंबर एक पार्टी रही और नरेंद्र मोदी पूरे अभियान में नंबर एक नेता रहे.

(इनपुट एजेंसी)