Fact Check: क्या भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2000 रुपये के नोटों की आपूर्ति बंद कर दी है और इस वजह से ATM से अब सिर्फ 100, 200 व 500 रुपये के ही नोट ही निकाले जा सकेंगे? ये खबर सोशल मीडिया और कई न्यूज साइटों पर वायरल हो रही है. अब सरकार की तरफ से इसे लेकर स्पष्टीकरण जारी किया गया है और इस खबर को फेक बताया गया. PIB Fact Check की तरफ से ट्वीट किया गया, ‘एक न्यूज आर्टिकल में दावा किया जा रहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने 2000 रुपये के नोटों की आपूर्ति बंद कर दी है. इस वजह से एटीएम से केवल 100, 200 व 500 रुपये के नोट ही निकाले जा सकेंगे. पीआईबी के फैक्ट चेक में यह दावा फर्जी पाया गया. Also Read - क्या बंद हो रहे हैं 100 रुपये के पुराने नोट? RBI ने कहा- यह सामान्य प्रक्रिया है

पीआईबी ने कहा, यह दावा फर्जी है और भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने 2000 के नोटों की आपूर्ति बंद नहीं की है.

बता दें कि देश में जारी कोरोना संकट (Coronavirus) के बीच इंटरनेट और सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों का चलन काफी बढ़ गया है. सरकार की तरफ से लोगों को कहा जाता है कि जब तक कोई आधिकारिक घोषणा न हो तब तक भ्रामक खबरों (Fake News) पर भरोसा नहीं करें. इसके लिए PIB की तरफ से Fact Check की भी शुरुआत की गई है. इसका उद्देश्य लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना और भ्रामक खबरों के खिलाफ सचेत करना है.

इससे पहले एक खबर वायरल हो रही थी कि भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन (Hazrat Nizamuddin Railway Station) का नाम बदलकर ‘महाराणा प्रताप एक्सप्रेशन’ (Maharana Pratap Expression) कर दिया है. हालांकि यह खबर भी फर्जी निकला और सरकार की तरफ से इसे फेक न्यूज बताया गया .

PIB fact Check की तरफ से ट्वीट कर बताया गया, ‘दावा: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक पोस्ट मे दावा किया जा रहा है कि भारतीय रेलवे ने हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर अब ‘महाराणा प्रताप एक्सप्रेशन’ कर दिया है. यह दावा फर्जी है. रेलवे ने ऐसा कोई फैसला नहीं लिया है.

इससे पहले एक अन्य खबर में दावा किया गया था कि देश में एक दिसंबर से सभी ट्रेनों का परिचालन एक बार फिर बंद कर दिया जाएगा. इस बारे में व्हाट्सऐप और सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल हो रहा था. इस मैसेज में यह भी कहा गया है कि कोरोना काल में सरकार की ओर से घोषित स्पेशल ट्रेनों का परिचालन भी बंद किया जाएगा. पीआईबी की फैक्ट चेक में यह दावा भी फर्जी निकला था.

बता दें कि प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने इंटरनेट पर प्रचलित गलत सूचनाओं और फर्जी खबरों को रोकने के लिए दिसंबर 2019 में इस तथ्य-जांच विंग को लॉन्च किया. पीआईबी का उद्देश्य ‘सरकार की नीतियों और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर प्रसारित होने वाली योजनाओं से संबंधित गलत सूचना की पहचान करना है.’