Kisan Andolan: पीएम नरेंद्र मोदी ने आज अपने ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) कार्यक्रम में ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा (Tractor Rally Violence) का ज़िक्र करते हुए तिरंगे के अपमान की बात कही. पीएम ने कहा कि लाल किले पर तिरंगे का अपमान देख देश दुखी हुआ. पीएम मोदी की इस बात पर किसानों और किसान नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है. भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने पीएम की बात का जवाब दिया है.Also Read - गणतंत्र दिवस परेड से बंगाल की झांकी हटाई गई, केंद्र के फैसले से ‘स्तब्ध’ ममता बनर्जी ने PM मोदी को लिखा पत्र

नरेश टिकैत (Naresh Tikait) किसान नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) के भाई है. राकेश टिकैत किसान आंदोलन के सबसे अहम नेताओं में से एक हैं.
किसान नेता नरेश टिकैत ने कहा कि नए कृषि कानूनों (Farm Laws) के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गरिमा का सम्मान करेंगे, लेकिन वे अपने आत्म-सम्मान की रक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध हैं. Also Read - PM Modi at interaction with start ups: स्टार्टअप कारोबारियों संग संवाद में बोले PM मोदी, सपनों को सिर्फ लोकल ना रखें बल्कि ग्लोबल बनाएं

नरेश टिकैत ने कहा कि सरकार को ‘‘हमारे लोगों को रिहा करना चाहिए और वार्ता के अनुकूल माहौल तैयार करना चाहिए.’’उन्होंने दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बीच गाजीपुर सीमा पर कहा, ‘‘एक सम्मानजनक स्थिति पर पहुंचा जाना चाहिए. हम दबाव में कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे.’’ नरेश टिकैत ने कहा, ‘‘हम प्रधानमंत्री की गरिमा का सम्मान करेंगे. किसान नहीं चाहते कि सरकार या संसद उनके आगे झुके.’’उन्होंने कहा, ‘‘ हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि किसानों के आत्म-सम्मान की रक्षा हो. बीच का कोई रास्ता खोजा जाना चाहिए. वार्ता होनी चाहिए.’’ Also Read - Assembly Election 2022: CM योगी का अयोध्या से चुनाव लड़ना क्यों है फायदेमंद? जानें क्या है पर्दे के पीछे की कहानी

टिकैत ने कहा, ‘‘26 जनवरी को हुई हिंसा षड्यंत्र का हिस्सा थी. तिरंगा हर किसी से ऊपर है. हम किसी को इसका अपमान नहीं करने देंगे. इसे सहन नहीं किया जाएगा.’’दिल्ली पुलिस ने 26 जनवरी को हुई हिंसा के संबंध में करीब 40 मामले दर्ज किए हैं और 80 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है. उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री ने गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय राजधानी में हुई हिंसा के कुछ दिन बाद शनिवार को कहा था कि प्रदर्शनकारी किसानों के लिए उनकी सरकार का प्रस्ताव अब भी बरकरार है और बातचीत में महज ‘‘एक फोन कॉल की दूरी’’ है.