नई दिल्ली: राज्य सरकारों द्वारा किसानों के कर्ज माफ करने पर चिंता जताते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को कहा कि अगर कृषि लोन माफ किया जाता है तो इससे सरकारी घाटा बढ़ेगा और महंगाई में भी वृद्धि होगी. इस वक्त दो राज्य महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन नाजुक दौर से गुजर रहा है.Also Read - राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी पर साधा निशाना, बोले- डिफॉल्टरों के प्रति नरम है सरकार

 कर्ज माफी से सरकारी खजाने में आ सकती है कमी  Also Read - महाराष्ट्र के सीएम ठाकरे ने पूर्ण कृषि ऋण माफी का भरोसा दिलाया, फडणवीस पर साधा निशाना

आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा कि भले ही राज्य सरकारों का बजट उन्हें लोन माफी की अनुमति दे, लेकिन ऐसा करना उनके लिए रिस्की होगा. आरबीआई ने अपनी बाईमंथली मॉनिटरी पॉलिसी का एलान करते हुए कहा, ‘कृषि लोन में माफी की घोषणाएं बढ़ने से सरकारी खजाने में कमी का जोखिम पैदा हो सकता है.  पटेल ने कहा कि लोन माफी के मामले बढ़ने से ऐसे राज्यों को तगड़ा झटका लग सकता है, जो बीते 2-3 साल के फिस्कल सख्ती के बाद सुधार की राह पर बढ़े हैं. Also Read - इस्‍तीफे के बाद पहली बार NPA पर बोले उर्जित पटेल, कहा- RBI ने समय पर पर उपाय नहीं किए

सरकारी खजाने में कमी आने से महंगाई का खतरा

उर्जित पटेल ने कहा कि हमारे देश में पहले भी जब ऐसी घटनाएं हुई हैं तो इसका सीधा असर सरकारी खजानों पर ही पड़ा है, जिससे महंगाई बढ़ी है. उर्जित ने कहा कि कोई भी फैसला लेने से पहले हमें काफी सतर्कता से आगे बढ़ने की जरूरत है और ऐसा हालात काबू से बाहर निकलन से पहले करने की जरूरत है.

कर्ज माफी का महाराष्ट्र सरकार कर चुकी है ऐलान 
महाराष्ट्र में किसानों के आंदोलन को देखते हुए सीएम देवेंद्र फडनवीस ने बुधवार को किसानों से बातचीत करने पर सहमति जता दी है. एक अहम फैसला लेते हुए उन्होंने किसानों की कर्ज माफी का ऐलान कर दिया है. उन्होंने कहा कि 31अक्टूबर से पहले लिए गए किसानों के सभी कर्ज माफ कर दिए जाएंगे.5 एकड़ से कम जमीन वाले 1.07 करोड़ किसान इसके लिए पात्र होंगे.

 सरकारी खजाने पर 30 हजार करोड़ का पड़ सकता है बोझ 

उत्तर प्रदेश में 36 हजार करोड़ के कर्ज हुए थे माफ इससे पहले अप्रैल में उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों के 36 हजार करोड़ रुपए के कर्ज माफ किए थे और अगर महाराष्ट्र कर्ज माफी स्कीम को लागू करता है तो इसका राज्य सरकार के खजाने पर 30 हजार करोड़ रुपए का बोझ पड़ने का अनुमान है.