farmers Breaking News: नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों की केंद्र सरकार के साथ पांचवें दौरा की वार्ता का भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकला. सरकार ने शनिवार को प्रदर्शनकारी किसानों के प्रतिनिधियों के साथ नौ दिसंबर को एक और बैठक का प्रस्ताव दिया है. दरअसल पांचवे दौर की बातचीत में भी कोई समाधान नहीं निकला क्योंकि इसमें शामिल किसानों के प्रतिनिधि मौन व्रत धारण कर रखा था और कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग का स्पष्ट ‘हां’ या ‘नहीं’ में जवाब चाह रहे थे. Also Read - Farmers Protest: कृषि कानूनों को 1.5 साल तक रोकने पर सरकार तैयार, अगली बैठक 22 जनवरी को...

सरकार के साथ पांचवें दौर की बैठक के बाद किसान नेताओं ने कहा, “केंद्र सरकार ने कहा है कि वे हमें 9 दिसंबर को एक प्रस्ताव भेजेंगे. हम आपस में इस पर चर्चा करेंगे जिसके बाद उसी दिन उनके साथ एक बैठक आयोजित की जाएगी.” Also Read - Kisan Andolan: फिर नहीं बनी बात, सरकार और किसान संगठनों के बीच 10वें दौर की बातचीत भी बेनतीजा खत्म, 22 को अगली बैठक

किसान कानूनों पर सरकार के साथ हुई बैठक के बाद एक किसान नेता ने कहा कि सरकार ने तीन दिन का समय मांगा है. 9 दिसंबर को सरकार हमें प्रपोज़ल भेजेगी, उस पर विचार करने के बाद बैठक होगी. 8 तारीख को भारत बंद जरूर होगा. ये कानून ज़रूर रद्द होंगे. Also Read - Kisan Andolan Latest Updates: आंदोलनकारी अन्नदाताओं को मनाने के लिए किसानों और सरकार के बीच 10वें दौर की वार्ता शुरू

क्या बोले कृषि मंत्री

किसान कानूनों पर किसान नेताओं के साथ हुई बैठक पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, “हमने कहा है कि MSP जारी रहेगी. MSP पर किसी भी प्रकार का खतरा और इस पर शंका करना बेबुनियाद है अगर फिर भी किसी के मन में शंका है तो सरकार उसका समाधान करने के लिए पूरी तरह तैयार है.”

उन्होंने कहा, “APMC राज्य का एक्ट है. राज्य की मंडी को किसी भी तरह से प्रभावित करने का न हमारा इरादा है और न ही कानूनी रूप से वो प्रभावित होती है. इसे और मज़बूत करने के लिए सरकार तैयार है. अगर इस बारे में किसी को कोई गलतफहमी है तो सरकार समाधान के लिए तैयार है.”

इससे पहले दिन में केंद्र के नये कृषि कानूनों के विरुद्ध चल रहे प्रदर्शनों को लेकर बने गतिरोध को तोड़ने का प्रयास करते हुए सरकार ने शनिवार को आंदोलनकारी किसानों के प्रतिनिधियों से कहा कि उनकी चिंताओं पर ध्यान दिया जा रहा है लेकिन किसान संगठनों के नेता कानूनों को निरस्त करने की अपनी मांग पर अड़े रहे और उन्होंने बातचीत बीच में छोड़ने की चेतावनी दी.

हालांकि, सरकार किसान नेताओं को वार्ता जारी रखने के लिए मनाने में सफल रही. यह सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच पांचवें दौर की वार्ता थी. किसानों का दावा है कि इन कानूनों से मंडी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था समाप्त हो जाएगी.

अपराह्न ढाई बजे शुरू हुई बैठक जब चाय ब्रेक के बाद दोबारा शुरू हुई तो किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार सितंबर में लागू तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के बारे में नहीं सोच रही तो वे बैठक छोड़कर चले जाएंगे. ब्रेक में किसान नेताओं ने अपने साथ लाया भोजन और जलपान किया.