नई दिल्ली: कर्जमाफी और अपनी अन्य मांगों को लेकर हजारों किसान संसद मार्ग पर प्रदर्शन कर रहे हैं. पिछले दो दिनों से देश के अलग-अलग हिस्से से आए किसान दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं. इस बीच एक पर्चा वायरल हो रहा है जिसे पढ़कर किसानों की परेशानी को समझा जा सकता है. इसकी हेडिंग है माफ कीजिएगा. हमारे इस मार्च से आपको परेशानी हुई होगी. पर्चे में लिखा है, हम किसान हैं. आपको तंग करना हमारा इरादा नहीं है. हम खुद बहुत परेशान हैं. सरकार को और आपको अपनी बात सुनाने बहुत दूर से आए हैं. हमें आपका बस एक मिनट चाहिए. आपको पता है दाल, सब्जी, फल के लिए हमें क्या भाव मिलता है और आप क्या दाम देते हैं.

                                      हमें मिलता है  (किसानों)               आप देते हैं
मूंग साबुत                        46 रु. किलो                                    120 रुपए किलो
टमाटर                              5 रु.किलो                                       30 रु किलो
सेब                                  10 रुपए किलो                                110 रु किलो
दूध                                   20 रुपए लीटर                               42 रुपए लीटर

यह है हमारी परेशानी. हम हर चीज महंगी खरीदते हैं और सस्ती बेचते हैं. हमारी जान भी सस्ती है. पिछले 20 सालों में तीन लाख से ज्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं. हमारी मुसीबत की चाबी सरकार के पास है. लेकिन वो हमारी सुनती है. सरकार की चाबी मीडिया के पास है लेकिन वो हमें देखता नहीं. और मीडिया की चाबी आपके पास है. आप हमारी बात सुनेंगे.

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इस उम्मीद से हम आपको अपनी दुख तकलीफ समझाने आए हैं. हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि संसद का विशेष अधिवेशन किसानों की समस्या पर बुलाया जाए. और उसमें किसानों के लिए दो कानून पास किए जाएं. फसलों के उचित दाम की गारंटी का कानून और किसानों को कर्ज मुक्त करने का कानून. कुछ गलत तो नहीं माग रहे हम. अगर आपको हमारी बात सही लगी तो इस मार्च में दो कदम हमारे साथ चलिए. अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के बैनर तले लगभग 200 किसान संगठनों, राजनीतिक दलों और अन्य समाजिक संगठनों से किसानों की मांग का समर्थन करते हुये आंदोलन में भागीदारी की है. समिति के महासचिव अवीक शाहा और स्वराज इंडिया के संयोजक योगेन्द्र यादव की अगुवाई में दक्षिण पश्चिमी दिल्ली के बिजवासन से सुबह शुरु हुयी किसान मुक्ति यात्रा लगभग 25 किमी की पदयात्रा कर देर शाम रामलीला मैदान पहुंची थी.